दीप्ति जीवनजी की संघर्ष से गोल्ड तक की कहानी, कभी उड़ाया था मजाक आज एशियन पैरा गेम्स में रचा इतिहास

Knews Desk- जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारतीय पैरा एथलीट दीप्ति जीवनजी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया है। उन्होंने महिलाओं की 400 मीटर टी20 श्रेणी के फाइनल में 56.36 सेकंड का समय निकालकर पहला स्थान हासिल किया। इसके साथ ही उन्होंने गेम्स रिकॉर्ड भी बनाया। दीप्ति की यह उपलब्धि भारतीय खेल जगत के लिए गर्व का पल है। उनकी सफलता इसलिए भी खास है, क्योंकि उन्होंने जीवन में कई सामाजिक चुनौतियों का सामना करने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।

दीप्ति जीवनजी का जन्म तेलंगाना के वारंगल जिले के कल्लेड़ा गांव में हुआ था। वह बौद्धिक दिव्यांगता के साथ पैदा हुई थीं। जन्म के समय उनके सिर का आकार छोटा और चेहरे की बनावट असामान्य होने के कारण गांव के कुछ लोगों और रिश्तेदारों ने उनके साथ भेदभाव किया। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ लोग उनकी तुलना जानवरों से करते थे, जबकि कई लोगों ने उनके माता-पिता को बच्ची को अनाथालय में छोड़ने तक की सलाह दी थी। हालांकि, उनके माता-पिता ने ऐसा नहीं किया। दिहाड़ी मजदूर होने और सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी का पालन-पोषण किया और उसे आगे बढ़ने का अवसर दिया।दीप्ति के जीवन में बदलाव तब आया, जब उनके स्कूल के पीईटी शिक्षक बियानी वेंकटेश्वरलू ने उनकी दौड़ने की क्षमता को पहचाना। दीप्ति ने नौवीं कक्षा में दौड़ना शुरू किया। इसके बाद कोच नागपुरी रमेश ने उन्हें प्रशिक्षण दिया और उनकी प्रतिभा को निखारने में मदद की। आगे चलकर दिग्गज बैडमिंटन खिलाड़ी पुलेला गोपीचंद के सुझाव पर उन्हें हैदराबाद स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर द एम्पावरमेंट ऑफ पर्सन्स विद इंटेलेक्चुअल डिसएबिलिटी में परीक्षण के लिए ले जाया गया। इसके बाद वह पैरा-एथलीट के रूप में प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने लगीं।

दीप्ति ने इससे पहले 2023 में हांगझोऊ में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में भी गोल्ड मेडल जीता था। अब 2026 में दोबारा स्वर्ण पदक हासिल करके उन्होंने अपनी प्रतिभा और निरंतरता साबित की है। महिलाओं की 400 मीटर टी20 स्पर्धा में 56.36 सेकंड का समय निकालकर गेम्स रिकॉर्ड बनाना उनकी मेहनत और समर्पण को दर्शाता है। उनकी उपलब्धि उन लोगों के लिए भी प्रेरणा है, जो सामाजिक भेदभाव और कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं।एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारत के अन्य खिलाड़ियों ने भी पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। जैवलिन थ्रो की F53/F54 स्पर्धा में प्रदीप कुमार ने सिल्वर मेडल हासिल किया। वहीं, टेबल टेनिस में भाविना पटेल ने कांस्य पदक जीता। उन्हें चीन की आठ बार की पैरालंपिक चैंपियन झांग बियान के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। दीप्ति जीवनजी की सफलता केवल एक गोल्ड मेडल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात का उदाहरण है कि परिवार का सहयोग, सही मार्गदर्शन और लगातार मेहनत किसी भी खिलाड़ी को बड़ी उपलब्धि हासिल करने में मदद कर सकते हैं।

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