Knews Desk– अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की तैयारी में है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के मुताबिक, वॉशिंगटन अगले सप्ताह ईरान के खिलाफ अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंधों का ऐलान कर सकता है। इन प्रतिबंधों का मकसद ईरान की कमाई के प्रमुख स्रोतों को निशाना बनाना और उसके तेल कारोबार, वित्तीय नेटवर्क तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर दबाव बढ़ाना है। इस पूरे मामले पर बेसेंट सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में अहम जानकारी दे सकते हैं।
अमेरिका लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम, मानवाधिकारों और क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर प्रतिबंध लगाता रहा है। हालांकि, फरवरी में शुरू हुए युद्ध के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है। ट्रंप प्रशासन ने समुद्री, ऊर्जा और वित्तीय क्षेत्र में पहले ही कई प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से अब तक ईरान से जुड़े एक हजार से ज्यादा लोगों, जहाजों और विमानों को प्रतिबंधित किया जा चुका है। इसके अलावा ईरान से जुड़ी करीब 500 मिलियन डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी भी फ्रीज की गई है।
अमेरिका के नए प्लान में चीन की छोटी रिफाइनरियां भी निशाने पर हो सकती हैं। ईरान के तेल का सबसे बड़ा खरीदार चीन है और 2025 के आंकड़ों के अनुसार ईरान के 80 फीसदी से ज्यादा तेल की खरीद चीन करता है। चीन की छोटी और स्वतंत्र रिफाइनरियां, जिन्हें ‘टीपॉट’ रिफाइनरी कहा जाता है, ईरानी तेल की खरीद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने के लिए इन संस्थानों के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी की जा सकती है।इसके साथ ही अमेरिका चीन के बड़े बैंकों पर भी दबाव बढ़ा रहा है। अमेरिकी अधिकारियों ने चीन के दो बड़े बैंकों को चेतावनी दी है कि अगर उनके जरिए ईरानी फंड का लेनदेन हुआ तो उन्हें भी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, अमेरिका इस कदम को लेकर सावधानी बरत रहा है क्योंकि चीन जवाबी कार्रवाई करते हुए महत्वपूर्ण तकनीकी खनिजों के निर्यात पर रोक लगा सकता है।
ईरान पर दबाव बनाने के लिए फर्जी कंपनियों और वित्तीय नेटवर्क को भी निशाना बनाया जा रहा है। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि ईरान प्रतिबंधों से बचने के लिए लगातार नई कंपनियां बनाकर तेल से होने वाली कमाई को दूसरे रास्तों से हासिल करता है। ऐसे नेटवर्क को तोड़ना ट्रंप प्रशासन की रणनीति का अहम हिस्सा हो सकता है।समुद्री और हवाई रास्तों के बाद जमीन के रास्ते ईरान को घेरने की संभावना पर भी चर्चा हो रही है। ईरान की सीमाएं इराक, तुर्की, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, अजरबैजान और आर्मेनिया से लगती हैं। अगर इन रास्तों पर व्यापारिक दबाव बढ़ाया जाता है तो ईरान के लिए भोजन, ऊर्जा और दूसरे जरूरी सामानों के आयात में मुश्किलें पैदा हो सकती हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी व्यापक जमीनी नाकेबंदी को लागू करना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा।
इसके अलावा ट्रंप प्रशासन उन देशों पर भी नए टैरिफ लगाने की तैयारी कर सकता है जो ईरान के साथ व्यापार करते हैं। अगर ऐसा हुआ तो ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों और कंपनियों पर आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है। हालांकि, इस तरह के किसी नए कदम के लिए कानूनी और राजनीतिक चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं।कुल मिलाकर अमेरिका की रणनीति ईरान के तेल राजस्व, बैंकिंग नेटवर्क, व्यापारिक कंपनियों और परिवहन मार्गों पर एक साथ दबाव बनाने की दिखाई दे रही है। यदि प्रस्तावित प्रतिबंध लागू होते हैं, तो इसका असर ईरान की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ चीन और खाड़ी क्षेत्र के व्यापारिक रिश्तों पर भी पड़ सकता है। आने वाले दिनों में ट्रंप प्रशासन के नए ऐलान से यह साफ होगा कि अमेरिका ईरान पर आर्थिक दबाव को किस स्तर तक ले जाना चाहता है।