KNEWS DESK- रक्षाबंधन का त्योहार इस साल 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा. भाई की कलाई पर राखी बांधने से पहले जान लें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और राखी बांधने का सही समय.
रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का त्योहार है. इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हैं. वहीं भाई अपनी बहन की रक्षा का संकल्प लेते हैं. इस साल रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा. ऐसे में अगर आप भी सोच रहे हैं कि भाई को राखी सुबह बांधें, दोपहर में या शाम को, तो शुभ समय के बारे में जानना बेहद जरूरी है.
सुबह राखी बांधना सबसे शुभ
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रक्षाबंधन पर सुबह का समय राखी बांधने के लिए सबसे शुभ माना जाता है. इस साल भद्रा का प्रभाव सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगा, इसलिए सुबह राखी बांधने में भद्रा की बाधा नहीं रहेगी. 28 अगस्त को सुबह 5:57 बजे से लेकर 9:48 बजे तक राखी बांधने का शुभ समय रहेगा. इस दौरान बहनें स्नान करके साफ कपड़े पहनें, पूजा की थाली सजाएं और भाई को तिलक लगाने के बाद उसकी कलाई पर राखी बांध सकती हैं.
दोपहर में राखी बांधनी हो तो क्या करें?
अगर किसी वजह से सुबह राखी नहीं बांध पाएं, तो दोपहर में भी शुभ मुहूर्त देखकर यह रस्म की जा सकती है. अभिजीत मुहूर्त या शुभ चौघड़िया में राखी बांधना बेहतर माना जाता है. हालांकि, राखी बांधने से पहले उस समय चल रहे राहुकाल की जानकारी जरूर कर लें.
शाम को भी बांध सकते हैं राखी
कई भाई नौकरी या दूसरे कामों की वजह से सुबह घर पर नहीं रह पाते. ऐसी स्थिति में शाम के शुभ चौघड़िया में राखी बांधी जा सकती है. जरूरी है कि उस समय कोई अशुभ काल न चल रहा हो.
28 अगस्त को इस समय राखी न बांधें
रक्षाबंधन के दिन 28 अगस्त को सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक राहुकाल रहेगा. इसलिए इस अवधि में राखी बांधने से बचना चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राहुकाल को शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता है.
पूर्णिमा तिथि कब तक रहेगी?
इस बार पूर्णिमा तिथि 28 अगस्त की सुबह 9:48 बजे तक रहेगी. ऐसे में पूर्णिमा तिथि के दौरान सुबह राखी बांधना विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है.
राखी बांधते समय इन बातों का रखें ध्यान
राखी बांधते समय भाई को पहले तिलक लगाएं, फिर अक्षत और आरती करें. इसके बाद भाई की कलाई पर राखी बांधकर मिठाई खिलाएं. भाई अपनी बहन को उपहार देकर उसकी रक्षा और सम्मान का संकल्प ले सकता है. शुभ मुहूर्त और धार्मिक गणनाएं स्थान के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकती हैं. इसलिए अपने शहर के पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करना बेहतर रहेगा.