इंडियन आइडल में आजमाई किस्मत, अब ऑस्ट्रेलिया में बजाएगा क्रिकेट का नियमों का डंका, पराशर जोशी को मिली बड़ी जिम्मेदारी

Knews Desk- क्रिकेट और संगीत की दुनिया में अपनी पहचान बनाना आसान नहीं है, लेकिन पुणे के रहने वाले पराशर जोशी ने दोनों क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। कभी मशहूर सिंगिंग रियलिटी शो इंडियन आइडल के मंच पर अपनी गायकी से पहचान बनाने की कोशिश करने वाले पराशर आज क्रिकेट के मैदान पर अंपायर के रूप में नजर आते हैं। अब उन्हें भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच अंपायर एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत ऑस्ट्रेलिया में अंपायरिंग करने की जिम्मेदारी मिली है। इस कार्यक्रम के तहत पराशर ऑस्ट्रेलिया के घरेलू क्रिकेट टूर्नामेंट में महत्वपूर्ण मुकाबलों के दौरान मैदानी अंपायर की भूमिका निभाएंगे।

बीसीसीआई और क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने मौजूदा रणजी ट्रॉफी सीजन के दौरान अंपायरों के आदान-प्रदान की नई शुरुआत की है। इसके तहत ऑस्ट्रेलियाई अंपायर बेन ट्रेलोर भारत में रणजी ट्रॉफी के दो मुकाबलों में अंपायरिंग कर रहे हैं। वहीं, भारत की ओर से पराशर जोशी को ऑस्ट्रेलिया भेजा जा रहा है। यह पहल दोनों देशों के अंपायरों को एक-दूसरे की घरेलू क्रिकेट परिस्थितियों में काम करने और अनुभव हासिल करने का अवसर देगी।पराशर जोशी का क्रिकेट अंपायर बनने तक का सफर काफी दिलचस्प रहा है। उन्हें बचपन से ही संगीत का शौक था और उन्होंने गायकी में करियर बनाने के लिए कई प्रयास किए। लगातार तीन साल तक उन्हें सिंगिंग ऑडिशन में निराशा हाथ लगी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। चौथे साल फिर कोशिश करने पर उन्हें साल 2008 में इंडियन आइडल सीजन 4 में हिस्सा लेने का मौका मिला। वह शो के पियानो राउंड तक पहुंचे, हालांकि इसके बाद उनका सफर समाप्त हो गया। इंडियन आइडल से बाहर होने के बावजूद उन्होंने अपने जीवन में आगे बढ़ने का रास्ता तलाशना जारी रखा।

संगीत के साथ पराशर का जुड़ाव क्रिकेट से भी था। वह क्लब स्तर पर क्रिकेट खेलते थे, लेकिन बाद में उन्होंने अंपायरिंग को करियर के रूप में अपनाने का फैसला किया। क्रिकेट के नियमों की जानकारी और खेल के प्रति अपने अनुभव के दम पर उन्होंने इस क्षेत्र में आगे बढ़ना शुरू किया। साल 2015 में बीसीसीआई ने उन्हें अपने आधिकारिक अंपायर पैनल में शामिल किया। इसके बाद उन्होंने घरेलू क्रिकेट के कई महत्वपूर्ण टूर्नामेंटों में अंपायरिंग की।पराशर अब तक रणजी ट्रॉफी और दलीप ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंटों के 19 फर्स्ट क्लास मुकाबलों में मैदानी अंपायरिंग कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने विजय हजारे ट्रॉफी और देवधर ट्रॉफी के 32 लिस्ट-ए मुकाबलों तथा 40 टी20 मैचों में भी अंपायर की भूमिका निभाई है। उनके अनुभव में इंडियन प्रीमियर लीग (IPL), सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी और महिला प्रीमियर लीग (WPL) के मुकाबले भी शामिल हैं।

ऑस्ट्रेलिया में पराशर जोशी का कार्यक्रम भी काफी व्यस्त रहने वाला है। वह 11 से 14 नवंबर तक ब्रिस्बेन में क्वींसलैंड और तस्मानिया के बीच होने वाले शेफील्ड शील्ड के चार दिवसीय मुकाबले में अंपायरिंग करेंगे। इसके बाद 16 नवंबर को उसी मैदान पर ऑस्ट्रेलिया के घरेलू वनडे कप के एक मुकाबले में मैदानी अंपायर की जिम्मेदारी संभालेंगे। फिर 22 से 25 नवंबर तक सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर न्यू साउथ वेल्स और क्वींसलैंड के बीच होने वाले शेफील्ड शील्ड मैच में अंपायरिंग करेंगे।पराशर जोशी की कहानी बताती है कि असफलता के बाद भी नए रास्ते तलाशे जा सकते हैं। इंडियन आइडल के मंच से शुरू हुआ उनका सफर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंपायरिंग की जिम्मेदारी तक पहुंच गया है। ऑस्ट्रेलिया में मिलने वाला यह अवसर उनके क्रिकेट करियर के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *