Asian Games 2026: सलमान खान-सतनाम सिंह ने जीता ब्रॉन्ज, रोइंग में भारत का 36 साल पुराना सिलसिला जारी

Knews Desk– सलमान खान और सतनाम सिंह ने अपनी रेस 6:13.25 मिनट में पूरी की और तीसरे स्थान पर रहे। भारतीय जोड़ी ने रेस के दौरान शानदार प्रदर्शन किया। 1500 मीटर तक सलमान और सतनाम दूसरे स्थान पर चल रहे थे, लेकिन फिनिश लाइन से पहले वे तीसरे स्थान पर खिसक गए। इसके बावजूद दोनों ने कांस्य पदक अपने नाम कर भारत को एशियन गेम्स 2026 में रोइंग का मेडल दिलाया।

इस पदक की खास बात यह है कि सलमान खान और सतनाम सिंह को एशियन गेम्स 2026 में उनके मूल इवेंट से महज तीन दिन पहले दूसरे इवेंट में भेज दिया गया था। दोनों को क्वाड्रपल्स स्कल्स से हटाकर मेंस डबल स्कल्स इवेंट में उतारा गया। ऐसे में दोनों खिलाड़ियों के पास एक-दूसरे के साथ तालमेल बैठाने और नए इवेंट की तैयारी करने के लिए 72 घंटे से भी कम समय था। इतने कम समय में बदलाव के बावजूद दोनों ने रेस में शानदार प्रदर्शन किया और भारत के लिए पदक हासिल किया।भारतीय रोअर्स ने इवेंट बदले जाने के फैसले का विरोध भी किया था। खिलाड़ियों का कहना था कि उन्होंने अपने निर्धारित इवेंट के लिए तैयारी की थी, ऐसे में अचानक दूसरे इवेंट में उतरना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था। इसके बावजूद सलमान खान और सतनाम सिंह ने नई चुनौती को स्वीकार किया और मेंस डबल स्कल्स में देश के लिए पदक जीतने में कामयाब रहे।

रोइंग फेडरेशन की ओर से इवेंट में बदलाव को लेकर कहा गया था कि यह फैसला ज्यादा से ज्यादा मेडल हासिल करने के मकसद से लिया गया है। खिलाड़ियों के इवेंट बदलने के फैसले को लेकर सवाल भी उठे, लेकिन सलमान और सतनाम के प्रदर्शन ने भारत के खाते में एक और पदक जोड़ दिया।सलमान खान और सतनाम सिंह के ब्रॉन्ज मेडल के साथ एशियन गेम्स में रोइंग में भारत के पदक जीतने का सिलसिला 36 साल बाद भी जारी है। भारत ने 1990 से लेकर अब तक एशियन गेम्स में रोइंग में मेडल जीते हैं और 2026 में भी यह क्रम बरकरार रहा। दोनों खिलाड़ियों के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने बेहद कम समय में बदले हुए इवेंट के हिसाब से खुद को तैयार किया और पोडियम पर जगह बनाई।एशियन गेम्स 2026 में भारतीय दल के लिए रोइंग से आया यह कांस्य पदक इस बात का भी उदाहरण है कि अंतिम समय में आई चुनौती के बावजूद खिलाड़ियों ने अपना प्रदर्शन जारी रखा। सलमान खान और सतनाम सिंह ने तीसरे स्थान पर रहते हुए भारत के लिए ब्रॉन्ज मेडल सुनिश्चित किया और रोइंग में देश की 36 साल पुरानी पदक परंपरा को आगे बढ़ाया

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