Knews Desk– नई दिल्ली के आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में वरिष्ठ पत्रकार और प्रखर संपादक रामबहादुर राय के 80वें जन्मदिन के अवसर पर ‘अस्सी के राय साहब’ पुस्तक का विमोचन किया गया। पुस्तक का विमोचन केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और वरिष्ठ पत्रकार बनवारी ने किया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
पुस्तक के मुख्य संपादक हेमंत शर्मा हैं, जबकि संपादक मंडल में मनोज मिश्रा, संदीप जोशी और संजीव कुमार शामिल हैं। पुस्तक में 119 गणमान्य लोगों ने रामबहादुर राय के व्यक्तित्व और उनके पत्रकारिता जीवन से जुड़े अनुभव साझा किए हैं।
राजनाथ सिंह ने कहा कि रामबहादुर राय का पत्रकारीय जीवन मूल्यों और समर्पण की मिसाल है, जिससे आज की युवा पीढ़ी को सीखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हिंदी पत्रकारिता ने देश के नवजागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और भाषा के निर्माण के साथ आधुनिक, व्यावहारिक, सरल, सहज, समावेशी और लोकतांत्रिक समाज के निर्माण में भी योगदान दिया।
राजनाथ सिंह ने कहा कि वर्तमान दौर की पत्रकारिता को लेकर जब कभी शुरुआती मूल्यों और आदर्शों से दूर जाने का संदेह पैदा होता है, तब रामबहादुर राय का व्यक्तित्व उनके सामने खड़ा हो जाता है। उन्होंने कहा कि 80 वर्ष की उम्र में भी राय ने संन्यासी की तरह पत्रकारिता के व्रत को निभाया है।
उन्होंने रामबहादुर राय की पत्रकारिता की तुलना भारतीय परंपरा के विभिन्न महान व्यक्तित्वों से करते हुए कहा कि उन्होंने पत्रकारिता की चादर को कबीर की तरह निभाया, कहने के कौशल को तुलसी की तरह बरता और सच्चाई तथा समाचार को हरिश्चंद्र की तरह थामे रखा। उन्होंने कहा कि राय की नजर अर्जुन की तरह खबर पर रही और कोई भी प्रभाव उन्हें उनके पत्रकारीय धर्म से डिगा नहीं सका।
राजनाथ सिंह ने कहा कि रामबहादुर राय के लिए पत्रकारिता कभी केवल पेशा नहीं रही। यह उनके लिए मिशन थी, मिशन है और मिशन ही रहेगी।
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने रामबहादुर राय को हिंदी पत्रकारिता का बड़ा हस्ताक्षर बताते हुए कहा कि उन्होंने धरातल के संघर्षों को लिखा। उन्होंने कहा कि राय केवल अकादमिक विषयों पर लिखने वाले पत्रकार नहीं, बल्कि जमीन से जुड़े संघर्षों और उनसे निकली कथाओं को सामने रखने वाले पत्रकार हैं। उन्होंने ईमानदारी से लिखा और सत्य के साथ खड़े रहे।
वरिष्ठ पत्रकार बनवारी ने हेमंत शर्मा को इस पुस्तक के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि रामबहादुर राय को अपनी प्रशंसा सुनना पसंद नहीं है और वह इस किताब के पक्ष में भी नहीं थे, लेकिन गुणी लोगों का सम्मान होना चाहिए।
प्रभात प्रकाशन के निदेशक प्रभात कुमार ने रामबहादुर राय को पत्रकारिता का संत बताते हुए उनके वैचारिक स्पष्टता, भारतीय इतिहास, संस्कृति और परंपराओं के प्रति गहरी आस्था को रेखांकित किया। वहीं, प्रभात प्रकाशन के निदेशक समूह के के पीयूष कुमार ने कहा कि प्रकाशन का प्रयास ऐसी पुस्तकों को सामने लाना है, जो वैचारिक चिंतन को धार दें और सामाजिक-सांस्कृतिक परिस्थितियों पर सार्थक संवाद का माध्यम बनें।