KNEWS DESK- 8 नवंबर 2026, रविवार को देशभर में दिवाली का त्योहार उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। इस दिन घरों में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के साथ व्यापारी वर्ग अपने व्यापार से जुड़ी चीजों की भी विशेष पूजा करता है। नए बही-खाते, हिसाब-किताब की किताबें और व्यापार में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को पूजा की चौकी पर रखकर पूजा करने की इस परंपरा को चोपड़ा पूजन या दफ्तर पूजन कहा जाता है।
दिवाली की रात होने वाला यह पूजन व्यापारियों के लिए विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की आराधना करने से कारोबार में बरकत और आर्थिक समृद्धि बनी रहती है। व्यापारी अपने नए बही-खातों की शुरुआत भी शुभता और ईश्वर के आशीर्वाद के साथ करना चाहते हैं। इसी उद्देश्य से दिवाली के अवसर पर व्यापार से जुड़ी वस्तुओं की पूजा करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है।
मां लक्ष्मी की कृपा और कारोबार में बरकत की कामना
चोपड़ा पूजन का मुख्य उद्देश्य व्यापार में सफलता, लाभ और समृद्धि की कामना करना माना जाता है। व्यापारियों के लिए मां लक्ष्मी को धन और समृद्धि की देवी माना जाता है। दिवाली के अवसर पर व्यापारी अपनी मेहनत और कारोबार को ईश्वर को समर्पित करते हुए नए वर्ष की शुरुआत शुभ तरीके से करने की कामना करते हैं। इस दौरान सालभर के व्यापार से जुड़े बही-खाते और अन्य जरूरी कागजात मां लक्ष्मी के सामने रखे जाते हैं। धार्मिक आस्था के अनुसार, इस तरह पूजा करने से व्यापारी के मन में सकारात्मकता आती है और वह आने वाले वर्ष में अपने काम को नई ऊर्जा और मेहनत के साथ आगे बढ़ाने का संकल्प लेता है।
पुराने साल के लाभ-हानि के लिए जताते हैं आभार
दिवाली पर चोपड़ा पूजन के दौरान व्यापारी बीते वर्ष के कारोबार को भी याद करते हैं। सालभर व्यापार में हुए लाभ और नुकसान को ईश्वर के प्रति समर्पित करते हुए मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर का आभार व्यक्त किया जाता है। कारोबार में उतार-चढ़ाव सामान्य बात है। ऐसे में दिवाली की रात व्यापारी बीते वर्ष में जो कुछ हासिल हुआ, उसके लिए धन्यवाद देते हैं और नए वर्ष में बेहतर व्यापार की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ईश्वर के प्रति आभार व्यक्त करने से मन में विनम्रता आती है और व्यक्ति को अपने आने वाले समय के लिए नई ऊर्जा मिलती है।
बही-खातों पर बनाया जाता है शुभ-लाभ और स्वास्तिक
चोपड़ा पूजन के दौरान नए बही-खातों को विशेष रूप से सजाया जाता है। पूजा के बाद बही-खातों पर रोली या कुमकुम से स्वास्तिक और शुभ-लाभ लिखा जाता है। व्यापारी इसे आने वाले वर्ष में शुभता, बरकत और सफलता की कामना से जोड़कर देखते हैं। इन शुभ चिन्हों को नए खातों पर बनाकर व्यापारी प्रार्थना करते हैं कि आने वाला वर्ष ईमानदारी, पारदर्शिता और अच्छे कारोबार के साथ आगे बढ़े। धार्मिक आस्था के साथ यह परंपरा व्यापारियों को अपने काम के प्रति जिम्मेदारी और सकारात्मक सोच बनाए रखने की प्रेरणा भी देती है।
नए बही-खातों की पूजा क्यों होती है?
दिवाली पर नए बही-खातों की पूजा को कारोबार की नई शुरुआत से जोड़कर देखा जाता है। व्यापारी नए खातों को पूजा के दौरान मां लक्ष्मी और भगवान गणेश के सामने रखते हैं और अपने व्यापार में आने वाली बाधाओं के दूर होने की कामना करते हैं। मान्यता है कि किसी नए काम की शुरुआत ईश्वर का आशीर्वाद लेकर करने से उसमें शुभता बनी रहती है। इसी विश्वास के साथ व्यापारी दिवाली की रात नए बही-खातों का पूजन करते हैं। उनका उद्देश्य कारोबार में निरंतर प्रगति, आर्थिक स्थिरता और परिवार में सुख-समृद्धि की कामना करना होता है।
चोपड़ा पूजन केवल बही-खातों की पूजा तक सीमित परंपरा नहीं है, बल्कि यह व्यापारी के लिए बीते वर्ष के कारोबार को याद करने, ईश्वर के प्रति आभार व्यक्त करने और नए वर्ष में ईमानदारी तथा मेहनत के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लेने का अवसर भी माना जाता है।