KNEWS DESK- 8 नवंबर 2026, रविवार को देशभर में दिवाली का त्योहार पूरे उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। इस दिन घरों को दीपों और रंगोली से सजाया जाता है और शाम को शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी तथा भगवान गणेश की पूजा की जाती है। दिवाली की पूजा में कई ऐसी परंपराएं हैं, जिनका धार्मिक महत्व बताया गया है। इन्हीं में से एक पूजा की चौकी पर चांदी का सिक्का रखना भी है। कई घरों में चांदी के सिक्के पर मां लक्ष्मी या भगवान गणेश की आकृति बनी होती है और इसे पूजा के दौरान विशेष रूप से स्थापित किया जाता है।
धार्मिक मान्यताओं में चांदी को शुद्धता, शीतलता, शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। इसी वजह से दिवाली की पूजा में चांदी के सिक्के को शामिल करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। मान्यता है कि पूजा में चांदी का सिक्का रखने से घर में सुख-समृद्धि और आर्थिक खुशहाली बनी रहती है। पूजा समाप्त होने के बाद कई परिवार इस सिक्के को तिजोरी या धन रखने वाले स्थान पर सुरक्षित रखते हैं और इसे मां लक्ष्मी की कृपा तथा घर की बरकत का प्रतीक मानते हैं।
चांदी के सिक्के का मां लक्ष्मी से क्या संबंध है?
मां लक्ष्मी को धन, वैभव, ऐश्वर्य और सुख-समृद्धि की देवी माना जाता है। दिवाली के दिन उनकी पूजा का प्रमुख उद्देश्य घर-परिवार में सुख, शांति और आर्थिक संपन्नता की कामना करना होता है। धार्मिक परंपराओं में चांदी को शुभ धातु का दर्जा दिया गया है और पूजा-पाठ में चांदी से बनी वस्तुओं का इस्तेमाल भी किया जाता है। इसी धार्मिक मान्यता के चलते लक्ष्मी पूजन में चांदी के सिक्के को विशेष स्थान दिया जाता है। बाजार में मिलने वाले कई चांदी के सिक्कों पर मां लक्ष्मी की तस्वीर या उनके चरण चिह्न अंकित होते हैं। भक्त ऐसे सिक्कों को पूजा की चौकी पर रखकर मां लक्ष्मी का प्रतीकात्मक आह्वान करते हैं। मान्यता है कि इससे घर में धन-धान्य की कमी नहीं होती और मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।
चांदी के सिक्के के साथ गणेश जी की पूजा क्यों?
दिवाली पर मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा करने की भी परंपरा है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और प्रथम पूजनीय देवता माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार किसी भी शुभ कार्य से पहले गणेश जी की पूजा की जाती है, ताकि कार्य में आने वाली बाधाएं दूर हों। मां लक्ष्मी को धन और समृद्धि की देवी माना जाता है, जबकि भगवान गणेश बुद्धि, विवेक और शुभ शुरुआत के प्रतीक हैं। इसी वजह से दिवाली के लक्ष्मी पूजन में दोनों की एक साथ आराधना की जाती है। बाजार में ऐसे कई चांदी के सिक्के भी उपलब्ध होते हैं, जिन पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश दोनों की आकृतियां बनी होती हैं। इन्हें पूजा में रखना शुभ माना जाता है।
दिवाली की पूजा में चांदी का सिक्का कैसे रखें?
दिवाली की पूजा में चांदी का सिक्का रखने से पहले उसे साफ कर लेना चाहिए। इसके बाद इसे मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर के सामने पूजा की चौकी पर रखा जाता है।
- चांदी के सिक्के को साफ पानी से धोकर साफ कपड़े से पोंछ लें।
- सिक्के को लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा या तस्वीर के सामने स्थापित करें।
- सिक्के पर रोली या कुमकुम का तिलक लगाएं।
- इसके बाद अक्षत और फूल अर्पित करें।
- मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करें।
- पूजा के दौरान श्रद्धा के साथ मां लक्ष्मी के मंत्रों का जाप और आरती करें।
दिवाली के बाद चांदी के सिक्के को कहां रखें?
लक्ष्मी पूजन पूरा होने के बाद चांदी के सिक्के को सम्मानपूर्वक सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए। कई परिवार इसे पूजा स्थल पर रखते हैं, जबकि कुछ लोग इसे तिजोरी या धन रखने वाली जगह पर सुरक्षित रखते हैं। कुछ परिवार इस सिक्के को हर साल दिवाली की पूजा में दोबारा शामिल करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, दिवाली की पूजा में रखा गया चांदी का सिक्का मां लक्ष्मी के आशीर्वाद, धन-धान्य और घर की समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसलिए इसे साफ-सुथरी जगह पर सम्मान के साथ रखने की परंपरा है। इस तरह पूजा में चांदी का सिक्का रखना केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि सुख-समृद्धि और शुभता के प्रति आस्था का प्रतीक भी माना जाता है।