महाकालेश्वर मंदिर में दीपावली का पर्व अपनी विशेष धार्मिक परंपराओं और राजसी वैभव के साथ मनाया गया। रूप चतुर्दशी के अवसर पर तड़के 4 बजे बाबा महाकाल का विशेष अभ्यंग स्नान कराया गया और इसके बाद उनका भव्य राजसी श्रृंगार किया गया। इस दौरान दिनभर होने वाली पांचों आरतियों में गर्भगृह के भीतर फुलझड़ियां जलाकर आरती की गई। दीपों और फुलझड़ियों की रोशनी से महाकाल का दरबार बेहद अलौकिक नजर आया।
KNEWS DESK-द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में दीपावली की शुरुआत अन्य स्थानों से अलग परंपरा के अनुसार रूप चतुर्दशी की भस्म आरती से हुई। देशभर में अमावस्या के दिन दीपोत्सव मनाया जाता है, लेकिन राजाधिराज महाकाल के दरबार में चतुर्दशी की भस्म आरती से ही दीपावली उत्सव का शुभारंभ हो गया।
महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा के अनुसार, रूप चतुर्दशी के दिन तड़के 4 बजे मंदिर के पट खुले। पट खुलते ही मंदिर परिसर बाबा महाकाल के जयकारों से गूंज उठा। इसके बाद भगवान महाकाल का विशेष अभ्यंग स्नान कराया गया। परंपरा के मुताबिक स्नान से पहले बाबा को तिल के तेल से मालिश की गई।
इसके बाद पुजारी परिवार की महिलाओं ने केसर, चंदन, इत्र, खस और सफेद तिल से तैयार विशेष उबटन बाबा महाकाल को लगाया। उबटन के बाद भगवान को गर्म जल और सुगंधित द्रव्यों से स्नान कराया गया। स्नान के बाद बाबा महाकाल का सोने-चांदी के आभूषणों और दिव्य वस्त्रों से राजसी श्रृंगार किया गया।
फुलझड़ियों से आरती की खास परंपरा
महाकाल मंदिर की दीपावली की सबसे खास परंपराओं में फुलझड़ियों से आरती करना शामिल है। मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि तड़के होने वाली भस्म आरती से लेकर रात की शयन आरती तक दिनभर की सभी पांचों आरतियों में गर्भगृह में फुलझड़ियां जलाकर बाबा महाकाल की आरती की गई। दीपों और फुलझड़ियों की रोशनी के बीच महाकाल का दरबार बेहद आकर्षक दिखाई दिया। इस अनूठी परंपरा ने दीपावली के धार्मिक उत्सव को और भी विशेष बना दिया।
अन्नकूट में बाबा को लगा पारंपरिक व्यंजनों का भोग
दीपावली के अवसर पर भगवान महाकाल को अन्नकूट का विशेष महाभोग भी लगाया गया। इसके लिए विभिन्न पारंपरिक व्यंजन तैयार किए गए। अन्नकूट में गुजिया, पपड़ी, शकरपारे, खुरमे और खीर-पूड़ी शामिल रहे। इसके अलावा मौसमी सब्जियों, दाल-चावल के साथ बैंगन और मूली का भोग भी भगवान महाकाल को अर्पित किया गया। पारंपरिक व्यंजनों से सजे इस अन्नकूट ने महाकाल की दीपावली को और खास बना दिया।
महाशिवरात्रि तक गर्म जल से होगा बाबा का स्नान
ज्योतिर्लिंग परंपरा के अनुसार कार्तिक चौदस यानी रूप चतुर्दशी से बाबा महाकाल को गर्म जल से स्नान कराने की परंपरा शुरू होती है। सर्दियों के आगमन के संकेत के रूप में शुरू होने वाला यह क्रम अब महाशिवरात्रि तक जारी रहेगा।
इस अवधि में प्रतिदिन बाबा महाकाल को गर्म जल से स्नान कराया जाएगा। इस तरह रूप चतुर्दशी से शुरू हुई महाकाल की विशेष दीपावली परंपरा के साथ अब महाशिवरात्रि तक गर्म जल से अभ्यंग स्नान की परंपरा निभाई जाएगी।