Diwali 2026: दिवाली पर मां लक्ष्मी को लगाएं ये 5 भोग, खील-बताशे से लेकर मखाने की खीर तक है खास

KNEWS DESK- 8 नवंबर 2026, रविवार को देशभर में दिवाली का त्योहार पूरे उत्साह, उमंग और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। दिवाली की शाम शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। इस दौरान देवी-देवताओं को सात्विक और श्रद्धा से तैयार किए गए अलग-अलग तरह के भोग अर्पित किए जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, दिवाली पर मां लक्ष्मी को प्रिय माने जाने वाले भोग अर्पित करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।

दिवाली के दिन घरों की साफ-सफाई के बाद दीप जलाए जाते हैं और पूजा स्थल को सजाया जाता है। शाम के समय प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व बताया गया है। पूजा में मिठाइयों के साथ फल, खील-बताशे, मखाने की खीर और सूखे मेवे जैसे सात्विक खाद्य पदार्थों को भोग में शामिल किया जा सकता है। आइए जानते हैं दिवाली की शाम मां लक्ष्मी को कौन-से पांच खास भोग अर्पित किए जा सकते हैं।

खील-बताशे

दिवाली की पूजा में खील-बताशे चढ़ाने की परंपरा काफी पुरानी मानी जाती है। खील धान से तैयार होती है, इसलिए इसे नई फसल और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। वहीं बताशे मिठास और शुभता के प्रतीक माने जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, दिवाली पर मां लक्ष्मी को खील-बताशे अर्पित करने से घर में सुख और समृद्धि बनी रहती है। पूजा के बाद इन्हें प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों और आसपास के लोगों में बांटने की भी परंपरा है।

मखाने की खीर

दिवाली पर मां लक्ष्मी को मखाने की खीर का भोग लगाना भी शुभ माना जाता है। मखाने का इस्तेमाल पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में किया जाता है और इसे सात्विक खाद्य पदार्थ माना जाता है। मखाने को दूध और चीनी में पकाकर खीर तैयार की जाती है। स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें इलायची और मेवे भी डाले जा सकते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां लक्ष्मी को खीर अर्पित करने से घर में सुख, शांति और खुशहाली की कामना की जाती है। भोग तैयार करते समय साफ-सफाई और शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

बूंदी या बेसन के लड्डू

दिवाली के त्योहार पर मिठाइयों का विशेष महत्व रहता है। मां लक्ष्मी को बूंदी या बेसन के लड्डू का भोग भी लगाया जा सकता है। बेसन, घी और चीनी से तैयार लड्डू पारंपरिक मिठाइयों में शामिल हैं। धार्मिक मान्यता में मिठास को प्रसन्नता, शुभता और आपसी प्रेम का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से पूजा में मिठाई अर्पित करने की परंपरा है। भोग के लिए घर पर शुद्ध घी से लड्डू तैयार किए जा सकते हैं या सात्विक तरीके से तैयार किए गए लड्डू बाजार से भी लिए जा सकते हैं।

मौसमी फल

दिवाली की लक्ष्मी पूजा में ताजे और मौसमी फल भी अर्पित किए जा सकते हैं। फल प्रकृति से प्राप्त उपहार माने जाते हैं और इन्हें सात्विक आहार का हिस्सा माना जाता है। पूजा की थाली में केला, सेब, अनार, नारियल समेत अन्य ताजे फल रखे जा सकते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवी-देवताओं को फल अर्पित करना कृतज्ञता और समर्पण का भाव दर्शाता है। भोग में शामिल किए जाने वाले फल साफ और ताजे होने चाहिए। पूजा के बाद इन्हें प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों में बांटा जा सकता है।

मिश्री और सूखे मेवे

मां लक्ष्मी की पूजा में मिश्री और सूखे मेवों का भोग भी रखा जा सकता है। मिश्री को मिठास का प्रतीक माना जाता है, जबकि बादाम, काजू, किशमिश और अखरोट जैसे मेवों को पौष्टिकता और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है।

दिवाली के अवसर पर कई घरों में पंचमेवा या अलग-अलग सूखे मेवों का मिश्रण तैयार करके पूजा में अर्पित किया जाता है। इसके लिए एक साफ कटोरी में मिश्री और सूखे मेवे रखकर मां लक्ष्मी को भोग लगाया जा सकता है। पूजा के बाद इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।

दिवाली की पूजा में भोग का विशेष महत्व माना जाता है, लेकिन इसके साथ पूजा स्थल की स्वच्छता और भोग की सात्विकता का ध्यान रखना भी जरूरी है। श्रद्धा और भक्ति के साथ अर्पित किया गया भोग पूजा की परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

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