एक आपराधिक मामले में FIR में आरोपी का नाम दर्ज नहीं करने और बाद में नाम जोड़े जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस की ऐसी कार्यप्रणाली से लोगों का भरोसा कैसे कायम रहेगा।
Knews Desk- सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार, 30 सितंबर को एक मामले की सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए। मामला एक FIR से जुड़ा था, जिसमें शुरुआत में आरोपी का नाम दर्ज नहीं किया गया था। बाद में आरोपी की पहचान सामने आने के बावजूद FIR में उसका नाम नहीं जोड़ा गया। इसी प्रक्रिया को लेकर कोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाई।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुलिस हर चीज में कोई न कोई एजेंडा लेकर चलती नजर आती है। कोर्ट ने सवाल किया कि अगर पुलिस मामलों को इस तरह से संभालेगी तो आम लोगों का उस पर भरोसा कैसे बना रहेगा।
कोर्ट ने यहां तक कहा कि अगर जांच का यही तरीका रहा तो बेहतर होगा कि उत्तर प्रदेश पुलिस की सभी जांच में CBI को शामिल करने का निर्देश दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि इससे अच्छा है कि यूपी पुलिस को ही खत्म कर दिया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह की बकवास को किसी न किसी मोड़ पर रोकना ही होगा।
मामले में दर्ज FIR में शुरुआत में आरोपी को अज्ञात रखा गया था। बाद में जब आरोपी का नाम सामने आया, तब भी FIR में उसका नाम दर्ज नहीं किया गया। इसी बिंदु पर सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
सुप्रीम कोर्ट के सामने इससे पहले भी ऐसे मामले आते रहे हैं, जहां उत्तर प्रदेश पुलिस की जांच प्रक्रिया या कार्रवाई को लेकर सवाल उठे हैं। मौजूदा मामले में भी कोर्ट ने जांच के तरीके पर असंतोष जताते हुए पुलिस के रवैये को लेकर कड़ी टिप्पणियां कीं।