ईरान की अर्थव्यवस्था पर युद्ध, अमेरिकी प्रतिबंधों और तेल निर्यात में आई भारी कमी का असर साफ दिखाई दे रहा है। देश की GDP में 10.1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि अगस्त में औसत महंगाई दर 69.9 फीसदी तक पहुंच गई। कमजोर होती मुद्रा, कच्चे माल की कमी और तेल निर्यात में गिरावट ने आर्थिक संकट को और गंभीर बना दिया है।
Knews Desk- ईरान सरकार के आंकड़ों के अनुसार, मार्च के अंत से जून के अंत के बीच देश की GDP पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 10.1 फीसदी कम रही। यह फारसी कैलेंडर की पहली तिमाही का आंकड़ा है। इसी अवधि में ईरान अमेरिका और इजराइल के साथ युद्ध की स्थिति में था। IMF ने 2026 के लिए ईरान की औसत महंगाई 68.9 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। इसके मुकाबले भारत में अगस्त 2026 की खुदरा महंगाई 4.82 फीसदी रही।
ईरान की अर्थव्यवस्था तेल और गैस के निर्यात पर काफी निर्भर है। युद्ध के दौरान होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई, वहीं अमेरिका की ओर से ईरानी तेल निर्यात पर दोबारा प्रतिबंध लगाए गए। रॉयटर्स के अनुसार, ईरान से कच्चे तेल की लोडिंग मार्च में करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन थी, जो अगस्त में घटकर लगभग 2.2 लाख से 2.55 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई। तेल निर्यात में इस गिरावट से ईरान के लिए विदेशी मुद्रा जुटाना भी मुश्किल हो गया है।
ईरानी संसद के स्पीकर और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने इससे पहले कहा था कि पिछली नाकाबंदी के दौरान ईरान एक बैरल तेल तक निर्यात नहीं कर सका था। मौजूदा हालात में तेल क्षेत्र पर दबाव ने आर्थिक संकट को और बढ़ा दिया है।
महंगाई ने आम लोगों की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं। अगस्त में ईरान की 12 महीने की औसत महंगाई 69.9 फीसदी रही, जबकि पिछले साल अगस्त की तुलना में कीमतों में करीब 89 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी भी काफी तेज रही। सितंबर की शुरुआत में खुले बाजार में एक डॉलर की कीमत 22 लाख रियाल से अधिक हो गई, जबकि एक साल पहले यह करीब 10 लाख रियाल थी।
भारत से तुलना करें तो अगस्त 2026 में देश की खुदरा महंगाई 4.82 फीसदी रही, जो जुलाई के 4.45 फीसदी से अधिक थी। इस आधार पर ईरान की 69.9 फीसदी औसत महंगाई भारत की अगस्त CPI दर से करीब 14.3 गुना अधिक रही। वहीं, IMF ने 2026 में ईरान की वास्तविक GDP में 5.4 फीसदी गिरावट का अनुमान लगाया है।
युद्ध का असर ईरान के औद्योगिक क्षेत्र पर भी पड़ रहा है। अगस्त में कच्चे माल के स्टॉक का इंडेक्स 39.3 रहा, जबकि जुलाई में यह करीब 44.5 था। वहीं, देश का PMI 46.9 दर्ज किया गया। 50 से नीचे का PMI आर्थिक गतिविधियों में गिरावट का संकेत माना जाता है।
ईरान के स्टेटिस्टिक्स सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में उपभोक्ता कीमतें पिछले साल की तुलना में 84 फीसदी से अधिक बढ़ीं, जबकि सालाना महंगाई करीब 69 फीसदी रही। कच्चे माल की बढ़ती लागत और उपलब्धता में कमी से उत्पादन पर भी दबाव बढ़ रहा है।
ईरान के चैंबर ने चेतावनी दी है कि अगर मौजूदा परिस्थितियां लंबे समय तक जारी रहती हैं तो कच्चे माल और तैयार सामान का भंडार और कम हो सकता है। इससे उत्पादन क्षमता प्रभावित होने के साथ कुछ फैक्ट्रियों में उत्पादन धीमा पड़ने या बंद होने का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में युद्ध और आर्थिक दबाव के बीच ईरान के सामने अर्थव्यवस्था को संभालने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।