Knews Desk- साइबर अपराधियों ने ठगी के लिए अब धार्मिक भावनाओं और मदद की जरूरत को भी अपना हथियार बना लिया है। हैदराबाद और तेलंगाना में कुछ इमामों को निशाना बनाकर ठगों ने खुद को NRI बताया और मस्जिद निर्माण तथा गरीबों की मदद के लिए जकात देने का झांसा दिया। इस मामले में कुल पांच लोगों को ठगने की कोशिश की गई, जबकि हैदराबाद के ओल्ड सिटी में दो इमाम ठगी का शिकार हो गए।
ओल्ड सिटी के एड़ी बाजार इलाके के एक इमाम को 11 अगस्त की सुबह करीब 10:40 बजे एक व्यक्ति का फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को कनाडा में रहने वाला NRI बताया और इमाम के परिचित एक व्यक्ति का नाम लेकर भरोसा जीतने की कोशिश की। इसके बाद उसने मस्जिद के निर्माण और गरीब मुस्लिम अनाथ बच्चों की मदद के लिए आर्थिक सहयोग देने की बात कही।
इमाम ठग के झांसे में आ गए और तीन अलग-अलग किस्तों में कुल 77 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। जब कथित दान की रकम उनके खाते में नहीं पहुंची तो उन्हें शक हुआ। उन्होंने करीब एक घंटे के भीतर साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत की। शिकायत के बाद बैंक खाते को फ्रीज किया गया और दूसरे बैंक खाते के जरिए 77 हजार रुपये की रकम वापस मिल गई।
इसी तरह 10 अगस्त को ओल्ड सिटी के एक अन्य इमाम-खतीब को भी निशाना बनाया गया। ठगों ने उनके मोबाइल पर 80 हजार रुपये ट्रांसफर किए जाने का फर्जी मैसेज भेजा और फिर 50 हजार रुपये वापस भेजने के लिए कहा। इमाम ने मैसेज को सही मान लिया और अपने भाई से 50 हजार रुपये उधार लेकर ठगों के खाते में भेज दिए। बाद में पता चला कि उनके खाते में 80 हजार रुपये की कोई रकम आई ही नहीं थी।
आदिलाबाद के इमाम ने दिखाई समझदारी
आदिलाबाद की जोहरा मस्जिद के ट्रस्टी खिजर अहमद याफी के पास भी इसी तरह का फोन आया था। हालांकि, उन्हें कॉल करने वाले की बातों पर संदेह हुआ। उन्होंने ठगों की मांग मानने से इनकार कर दिया और किसी तरह का पैसा ट्रांसफर नहीं किया।
इस घटना से साफ है कि साइबर ठग अब लोगों को फंसाने के लिए सिर्फ लालच ही नहीं, बल्कि धार्मिक दान और सामाजिक मदद जैसे भरोसेमंद मुद्दों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे किसी भी फोन कॉल, फर्जी बैंक मैसेज या अचानक मिले आर्थिक सहयोग के प्रस्ताव पर बिना सत्यापन के भरोसा करना भारी पड़ सकता है।