टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग की घटना के बाद लॉरेंस बिश्नोई गैंग एक बार फिर सुर्खियों में है। इस मामले में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी की खबर सामने आई है और सोशल मीडिया पर गैंग से जुड़े एक व्यक्ति ने हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि लॉरेंस बिश्नोई का नेटवर्क दाऊद इब्राहिम की डी-कंपनी और छोटा राजन के गिरोह से कितना अलग है।
Knews Desk – बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ से जुड़े फायरिंग मामले के बाद लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नेटवर्क और उसके काम करने के तरीके पर चर्चा तेज हो गई है। 18 अक्टूबर की शाम टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग की घटना सामने आई थी। इस मामले में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी भी सामने आई। सोशल मीडिया पर अनिल पंडित नाम के व्यक्ति ने गैंग की ओर से जिम्मेदारी लेने का दावा किया है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम पहले भी कई चर्चित आपराधिक मामलों में सामने आ चुका है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इसका नेटवर्क पंजाब से निकलकर हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, महाराष्ट्र और अन्य क्षेत्रों तक फैला हुआ है। लॉरेंस बिश्नोई फिलहाल गुजरात की साबरमती जेल में बंद है, लेकिन उसके कथित नेटवर्क की गतिविधियों को लेकर जांच एजेंसियां लगातार कार्रवाई करती रही हैं।
कौन है लॉरेंस बिश्नोई?
लॉरेंस बिश्नोई ने शुरुआती पढ़ाई अबोहर में की और बाद में चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज में पढ़ाई की। इसके बाद उसने पंजाब यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की। कॉलेज की राजनीति के दौरान उसकी मुलाकात गोल्डी बराड़ से हुई। बाद में दोनों के नाम कई आपराधिक मामलों की जांच में सामने आए।
लॉरेंस बिश्नोई के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि उसके नेटवर्क में अलग-अलग राज्यों में सक्रिय सदस्य शामिल हैं और कुछ गतिविधियों का संचालन जेल में बंद रहने के दौरान भी किया जाता रहा है।
29 मई 2022 को पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या के मामले में लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ के नाम सामने आए थे। इसके अलावा, अभिनेता सलमान खान को धमकियां देने और अक्टूबर 2024 में बाबा सिद्दीकी की हत्या के मामले में भी बिश्नोई गैंग की कथित भूमिका जांच के दायरे में रही है।
लॉरेंस गैंग में कितने शूटर होने का दावा?
लॉरेंस बिश्नोई गैंग के सदस्यों की वास्तविक संख्या का कोई सार्वजनिक रूप से सत्यापित आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों में 2023 में जांच एजेंसियों के हवाले से उसके नेटवर्क में 600 से 700 से अधिक शूटर होने का दावा किया गया था। यह संख्या एक रिपोर्टेड अनुमान है, न कि स्वतंत्र रूप से सत्यापित सदस्य संख्या।
बताया जाता है कि गैंग की शुरुआत पंजाब से हुई और बाद में इसका नेटवर्क हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली तथा महाराष्ट्र समेत कई राज्यों तक फैला। कुछ रिपोर्टों में पंजाब से बड़ी संख्या में शूटर जुड़े होने का दावा किया गया है, लेकिन इन आंकड़ों को आधिकारिक रूप से प्रमाणित संख्या नहीं माना जाना चाहिए।
दाऊद इब्राहिम की डी-कंपनी कितनी बड़ी थी?
दाऊद इब्राहिम का गिरोह, जिसे डी-कंपनी के नाम से जाना जाता है, मुंबई के अंडरवर्ल्ड से उभरा और बाद में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने संपर्कों के लिए जाना जाने लगा। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, 1990 के दशक की शुरुआत में इसके सदस्यों की संख्या लगभग 5,000 बताई गई थी।
डी-कंपनी का नाम तस्करी, जबरन वसूली और अन्य संगठित आपराधिक गतिविधियों से जुड़ा रहा है। इसके वित्तीय और संपर्क नेटवर्क के दुबई तक फैले होने की रिपोर्टें सामने आती रही हैं। हालांकि, अलग-अलग समय पर इसके सदस्यों की संख्या और गतिविधियों के बारे में किए गए दावों में अंतर मिलता है।
छोटा राजन ने दाऊद से अलग होकर बनाया अपना गिरोह
छोटा राजन शुरुआत में दाऊद इब्राहिम के नेटवर्क से जुड़ा हुआ था। बाद में दोनों के रास्ते अलग हो गए और छोटा राजन ने अपना अलग गिरोह खड़ा किया। उसका नेटवर्क मुंबई के स्थानीय अपराध जगत और विदेशों में मौजूद संपर्कों पर आधारित बताया जाता रहा है।
छोटा राजन और दाऊद के बीच दुश्मनी को मुंबई अंडरवर्ल्ड के इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं में गिना जाता है। हालांकि, छोटा राजन के गिरोह में कुल कितने सदस्य थे, इसका कोई स्पष्ट और विश्वसनीय आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
तीनों गिरोहों के नेटवर्क में क्या अंतर है?
लॉरेंस बिश्नोई गैंग, दाऊद इब्राहिम की डी-कंपनी और छोटा राजन के गिरोह की पृष्ठभूमि, विस्तार और कथित काम करने के तरीकों में अंतर रहा है।
लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नेटवर्क कई राज्यों में फैला होने का दावा किया जाता है। इसकी गतिविधियों में स्थानीय संपर्कों, कथित सहयोगियों और सोशल मीडिया पर सामने आने वाले संदेशों की भूमिका को लेकर जांच होती रही है।
दूसरी ओर, डी-कंपनी का इतिहास मुंबई के अंडरवर्ल्ड से जुड़ा है और इसके अंतरराष्ट्रीय संपर्कों तथा कथित वित्तीय नेटवर्क की चर्चा लंबे समय से होती रही है। छोटा राजन का गिरोह दाऊद से अलग होने के बाद उभरा और मुंबई के अपराध जगत में उसकी अपनी पहचान बनी।
क्या डिजिटल नेटवर्क ने गैंगस्टरों का तरीका बदल दिया?
आज सोशल मीडिया और डिजिटल संचार के दौर में गैंगस्टरों के नाम से धमकी भरे संदेश और जिम्मेदारी लेने के दावे तेजी से फैल सकते हैं। ऐसे संदेशों का इस्तेमाल डर पैदा करने या किसी घटना को लेकर अपनी मौजूदगी दिखाने के लिए किया जा सकता है। हालांकि, किसी पोस्ट या वीडियो के आधार पर यह मान लेना सही नहीं है कि उसके पीछे वास्तव में संबंधित गिरोह ही है। इसकी पुष्टि जांच एजेंसियों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर की जानी चाहिए।
टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले के बाद भी यही सवाल अहम है कि घटना के पीछे किन लोगों की भूमिका थी, कथित जिम्मेदारी लेने वाले व्यक्ति का आरोपियों से क्या संबंध है और हमले के पीछे वास्तविक मकसद क्या था।
लॉरेंस बिश्नोई, दाऊद इब्राहिम और छोटा राजन के गिरोहों की तुलना से यह स्पष्ट होता है कि तीनों के ऐतिहासिक संदर्भ और नेटवर्क अलग-अलग रहे हैं। हालांकि, इनकी वास्तविक सदस्य संख्या, वर्तमान संपर्कों और गतिविधियों से जुड़े कई दावे जांच एजेंसियों की पुष्टि पर निर्भर करते हैं।