उद्घाटन के 20 दिन के भीतर कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर सड़क धंसी, NHAI ने रोकी टोल वसूली

कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर सड़क की गुणवत्ता को लेकर सामने आई शिकायतों के बाद NHAI ने बड़ा कदम उठाया है। क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत पूरी होने तक एक्सप्रेसवे पर यात्रियों से टोल नहीं लिया जाएगा। इसके साथ ही निर्माण और निगरानी में कथित लापरवाही को लेकर ठेकेदार कंपनी, इंजीनियरों और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

Knews Desk- उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को कानपुर से जोड़ने वाले कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे के उद्घाटन को अभी 20 दिन भी पूरे नहीं हुए थे कि सड़क धंसने और कई स्थानों पर ऊपरी परत खराब होने की शिकायतें सामने आने लगीं। सोशल मीडिया पर यात्रियों ने वीडियो और तस्वीरें साझा कर एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठाए। मामला सामने आने के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने टोल वसूली को अस्थायी रूप से रोकने का फैसला किया है।

NHAI के मुताबिक, एक्सप्रेसवे के प्रभावित हिस्सों को पूरी तरह दुरुस्त किए जाने तक किसी भी यात्री से टोल शुल्क नहीं लिया जाएगा। इस दौरान टोल बंद रहने से होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई कंसेशनियर से की जाएगी। करीब 63 किलोमीटर लंबे कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई को हुआ था। इसके कुछ ही हफ्तों बाद अलग-अलग हिस्सों में सड़क खराब होने और पैचवर्क की शिकायतें सामने आने लगीं। खास तौर पर उन्नाव से लखनऊ की ओर जाने वाले कैरिजवे की गुणवत्ता को लेकर यात्रियों ने सवाल उठाए।

इस एक्सप्रेसवे पर कार, जीप और वैन जैसे वाहनों से एक तरफ की यात्रा के लिए 275 रुपये टोल लिया जा रहा था। हालांकि, यात्रियों के लिए सालाना पास की सुविधा भी उपलब्ध थी।

26 जुलाई को सड़क धंसने की घटना

NHAI के अनुसार, 26 जुलाई को एक्सप्रेसवे के 64वें किलोमीटर के आसपास सड़क के एक हिस्से में स्लिपेज की सूचना मिली थी। घटना की जानकारी मिलते ही मरम्मत का काम शुरू किया गया और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रभावित स्थान से यातायात को डायवर्ट कर दिया गया।

प्राधिकरण का कहना है कि फिलहाल डायवर्जन के जरिए वाहनों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी है।

PNC इंफ्राटेक को कारण बताओ नोटिस

मामले में NHAI ने निर्माण से जुड़ी कंपनी PNC इंफ्राटेक लिमिटेड के खिलाफ भी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की है। कंपनी को ‘नॉन-परफॉर्मर’ घोषित करने के प्रस्ताव के साथ नोटिस जारी किया गया है। अगर यह कार्रवाई अंतिम रूप लेती है तो कंपनी को भविष्य में NHAI की परियोजनाओं की बोली में शामिल होने में परेशानी हो सकती है।

इसके अलावा कंपनी पर परफॉर्मेंस सिक्योरिटी के दो प्रतिशत के बराबर जुर्माना लगाने का भी प्रस्ताव है। कंपनी के पेवमेंट/हाईवे प्रमुख समेत जिम्मेदार कर्मचारियों को तीन साल तक प्रतिबंधित करने और कंसेशनियर की परफॉर्मेंस रेटिंग कम करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।

NHAI ने ठेकेदार को प्रभावित हिस्से की मरम्मत अपने खर्च पर करने का निर्देश दिया है। मरम्मत कार्य पर करीब 3 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान बताया गया है।

इंजीनियरों और अधिकारियों पर भी एक्शन

NHAI ने परियोजना से जुड़े कुछ अधिकारियों और इंजीनियरों के खिलाफ भी कार्रवाई की है। कंस्ट्रक्शन एजेंसी के प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक कुमार गुप्ता, इंडिपेंडेंट इंजीनियर टीम लीडर सुरेंद्र कुमार और रेजिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार को परियोजना से हटा दिया गया है।

इन अधिकारियों को दो साल के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, NHAI और NHIDCL की परियोजनाओं से प्रतिबंधित करने की कार्रवाई भी की गई है।

मौजूदा प्रोजेक्ट डायरेक्टर नकुल प्रकाश वर्मा को उनके मूल विभाग में वापस भेज दिया गया है। वहीं, कथित लापरवाही को लेकर उनके साथ पूर्व प्रोजेक्ट डायरेक्टर सौरभ चौरसिया के खिलाफ चार्जशीट जारी करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

प्रोजेक्ट की इंडिपेंडेंट इंजीनियर रही थीम इंजीनियरिंग सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को भी भविष्य की NHAI परियोजनाओं में भाग लेने से रोकने के प्रस्ताव के साथ नोटिस जारी किया जा रहा है।

IIT खड़गपुर के विशेषज्ञ करेंगे जांच

सड़क धंसने की असली वजह पता करने के लिए विशेषज्ञों की मदद भी ली जा रही है। IIT खड़गपुर के प्रोफेसर के.एस. रेड्डी के नेतृत्व में एक विशेषज्ञ टीम को जांच की जिम्मेदारी दी गई है। यह टीम सड़क में स्लिपेज के कारणों का अध्ययन करने के साथ भविष्य में ऐसी समस्या रोकने के लिए जरूरी सुधारों पर सुझाव देगी।

इसके अलावा पूरे एक्सप्रेसवे की सड़क की स्थिति की जांच लेजर प्रोफिलोमीटर तकनीक से कराई जाएगी। NHAI का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में गुणवत्ता, सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

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