8 नवंबर 2026, रविवार को देशभर में दिवाली का त्योहार बड़े उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। इस दिन घरों को दीपों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया जाता है और शाम को शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी तथा भगवान गणेश की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार दिवाली पर लक्ष्मी पूजन के साथ कथा पढ़ने और सुनने का भी विशेष महत्व है। इस दिन साहूकार की बेटी और मां लक्ष्मी से जुड़ी कथा सुनने की परंपरा है। मान्यता है कि श्रद्धा और भक्ति के साथ मां लक्ष्मी की आराधना करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
KNEWS DESK- दीपावली का पर्व भगवान श्रीराम के 14 वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटने की खुशी से भी जुड़ा माना जाता है। इसके साथ ही यह पर्व मां लक्ष्मी के प्राकट्य से भी संबंधित है। यही वजह है कि दिवाली की रात लक्ष्मी पूजन को विशेष महत्व दिया जाता है। पूजा के दौरान मां लक्ष्मी की कथा पढ़ना और सुनना भी शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं साहूकार की बेटी और मां लक्ष्मी से जुड़ी वह कथा, जिसे दिवाली के अवसर पर पढ़ा और सुना जाता है।
साहूकार की बेटी की भक्ति से प्रसन्न हुईं मां लक्ष्मी
पौराणिक कथा के अनुसार, पुराने समय में एक नगर में एक साहूकार रहता था। उसकी एक बेटी थी, जो धार्मिक स्वभाव की थी और मां लक्ष्मी की भक्ति में विश्वास रखती थी। वह प्रतिदिन सुबह पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाती और श्रद्धा के साथ उसकी पूजा करती थी। साहूकार की बेटी की भक्ति और सच्ची श्रद्धा से मां लक्ष्मी प्रसन्न हुईं। एक दिन माता ने उसे दर्शन दिए और उसकी भक्ति से प्रभावित होकर उसे अपनी सहेली बना लिया। इसके बाद दोनों के बीच गहरा स्नेह हो गया।
मां लक्ष्मी ने बेटी को भोजन पर बुलाया
एक दिन मां लक्ष्मी ने साहूकार की बेटी को अपने घर भोजन के लिए आमंत्रित किया। माता के निमंत्रण पर वह उनके घर पहुंची। वहां मां लक्ष्मी ने उसका विशेष आदर-सत्कार किया और सोने-चांदी के बर्तनों में तरह-तरह के स्वादिष्ट पकवान परोसे। मां लक्ष्मी के घर का वैभव और आतिथ्य देखकर साहूकार की बेटी बहुत प्रसन्न हुई। भोजन करने के बाद जब वह अपने घर लौटने लगी, तब मां लक्ष्मी ने उससे पूछा कि क्या वह भी उन्हें कभी अपने घर भोजन के लिए बुलाएगी। साहूकार की बेटी ने श्रद्धा के साथ माता को अपने घर आने का निमंत्रण दे दिया।
बेटी की बात सुनकर परेशान हुआ साहूकार
घर लौटकर साहूकार की बेटी ने अपने पिता को बताया कि मां लक्ष्मी उनके घर भोजन करने आने वाली हैं। यह सुनकर साहूकार चिंतित हो गया। उसके मन में विचार आया कि माता ने उसे सोने-चांदी के बर्तनों में भोजन कराया है, लेकिन उसके पास इतना धन नहीं है कि वह उसी तरह उनका स्वागत कर सके। तब साहूकार की बेटी ने अपने पिता को समझाया कि मां लक्ष्मी का स्वागत धन-दौलत से नहीं, बल्कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति से किया जाना चाहिए। बेटी की बात मानकर साहूकार ने माता के स्वागत की तैयारियां शुरू कर दीं।
श्रद्धा से किया स्वागत, घर में आई खुशहाली
साहूकार ने सबसे पहले अपने घर की साफ-सफाई करवाई। घर को गोबर से लीपकर पवित्र किया गया और मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए पूरी श्रद्धा के साथ भोजन की व्यवस्था की गई। साहूकार और उसके परिवार ने माता के आगमन की तैयारी भक्ति भाव से की। कथा के अनुसार, जब मां लक्ष्मी और भगवान गणेश साहूकार के घर पहुंचे तो परिवार ने पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ उनका स्वागत किया। साहूकार की भक्ति और सच्चे मन से किए गए आतिथ्य से मां लक्ष्मी और भगवान गणेश प्रसन्न हुए।
माता की कृपा से धीरे-धीरे साहूकार का घर धन-धान्य और सुख-संपत्ति से भर गया। परिवार में खुशहाली आने लगी और घर में किसी चीज की कमी नहीं रही। इसी मान्यता के चलते दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा के साथ साहूकार की बेटी और मां लक्ष्मी की इस कथा को पढ़ने और सुनने का विशेष महत्व बताया जाता है।