Knews Desk– बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश लौटने से पहले अपनी पार्टी आवामी लीग पर लगे प्रतिबंध के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कदम उठाया है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में याचिका दाखिल कर मांग की है कि उनकी पार्टी को फिर से चुनाव लड़ने की अनुमति दी जाए और बांग्लादेश में दोबारा चुनाव कराया जाए। हसीना का दावा है कि वर्ष 2026 में हुए चुनाव अवैध थे और उनमें उनकी पार्टी को हिस्सा लेने का अवसर नहीं दिया गया। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया के कारण बांग्लादेश में राजनीतिक अधिकारों और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को नुकसान पहुंचा है।
शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद वर्ष 2024 में आवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसके बाद 2026 में हुए चुनाव में भी पार्टी को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं मिली। हसीना की ओर से दाखिल याचिका में इसी प्रतिबंध को चुनौती दी गई है। बांग्लादेश के समाचार पत्र मानवजीवन के मुताबिक, इस कदम से तारिक रहमान की सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। याचिका में हसीना ने तारिक रहमान के नेतृत्व वाली सरकार की वैधता पर भी सवाल उठाए हैं।
याचिका में बांग्लादेश सरकार पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभा करने के अधिकार, संगठन बनाने की स्वतंत्रता और राजनीतिक अधिकारों से जुड़े प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। इसमें संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा के अनुच्छेद 19, 21, 22 और 25 का हवाला दिया गया है। हसीना का कहना है कि आवामी लीग बांग्लादेश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टियों में से एक है, लेकिन उसे चुनाव लड़ने से रोकना उसके समर्थकों के राजनीतिक अधिकारों का हनन है।
शेख हसीना ने यह भी दावा किया है कि आवामी लीग को चुनाव लड़ने की अनुमति मिलती तो चुनावी नतीजे अलग हो सकते थे और तारिक रहमान प्रधानमंत्री नहीं बन पाते। उन्होंने मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा है कि उनकी पार्टी को चुनावी प्रक्रिया से बाहर रखना लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करता है। हालांकि, ये दावे हसीना की ओर से लगाए गए आरोप हैं।
याचिका में बांग्लादेश की न्याय व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। शेख हसीना की ओर से संयुक्त राष्ट्र में याचिका वकील स्टीवन पॉवेल्स केसी ने दाखिल की है। याचिका के मुताबिक, आवामी लीग के कार्यकर्ताओं के मामलों की पैरवी करने के लिए वकील आगे आने से हिचक रहे हैं। इसमें आरोप लगाया गया है कि जो वकील इन मामलों में पैरवी करने की कोशिश करते हैं, उन्हें हमलों का सामना करना पड़ता है। इसी आधार पर हसीना का कहना है कि बांग्लादेश में उन्हें और उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं को निष्पक्ष न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है।
शेख हसीना ने संयुक्त राष्ट्र से आवामी लीग पर लगा प्रतिबंध हटाने, पार्टी को चुनाव लड़ने का अवसर देने और बांग्लादेश में नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की है। उनकी इस पहल से बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर चुनाव की वैधता, राजनीतिक स्वतंत्रता और न्यायिक व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो सकती है। हालांकि, याचिका पर संयुक्त राष्ट्र की ओर से क्या कदम उठाया जाता है और बांग्लादेश सरकार इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है, यह आगे स्पष्ट होगा।