कर्नाटक में SIR पर घमासान, एक करोड़ वोटर्स के नाम कटने पर कांग्रेस में ही उठे सवाल

कर्नाटक में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी विवाद गहरा गया है। मंत्री सतीश जारकीहोली ने प्रक्रिया को सही बताया, जबकि कांग्रेस के अन्य नेताओं ने कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए। बीजेपी ने इसे कांग्रेस का राजनीतिक विरोधाभास बताते हुए विपक्ष पर निशाना साधा है।

Knews Desk – कर्नाटक में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासत लगातार गरमाई हुई है। राज्य में करीब एक करोड़ वोटर्स के नाम हटाए जाने के बीच लोक निर्माण मंत्री और कांग्रेस नेता सतीश जारकीहोली ने गुरुवार को कहा कि कांग्रेस की ओर से दी गई ट्रेनिंग के बाद SIR प्रक्रिया सही ढंग से पूरी की गई। उनके इस बयान के बाद विवाद फिर गहरा गया है। बीजेपी कांग्रेस पर हमलावर है, वहीं कांग्रेस के ही कुछ नेता जारकीहोली के बयान पर सवाल उठा रहे हैं।

मंत्री सतीश जारकीहोली का यह बयान एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस की अगुवाई में होने वाली महारैली से ठीक पहले आया है। इस रैली का उद्देश्य चुनाव आयोग की ओर से कराई जा रही SIR प्रक्रिया के जरिए कथित तौर पर हुई ‘वोट चोरी’ के खिलाफ आवाज उठाना है। जारकीहोली का कहना है कि कांग्रेस ने कर्नाटक में SIR का विरोध नहीं किया, बल्कि अन्य राज्यों में इसे लागू करने के तरीके पर चिंता जताई थी।

जारकीहोली ने कहा, “हमने कर्नाटक में SIR का विरोध नहीं किया, बल्कि पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, बिहार आदि राज्यों में SIR प्रक्रिया को लेकर कई तरह से सवाल उठाए थे। हमारी दी गई ट्रेनिंग की वजह से कर्नाटक में SIR का काम सही ढंग से संपन्न कराया जा सका है।” उन्होंने आगे कहा कि वह चाहते हैं कि अन्य राज्यों में भी इसी तरह काम हो।

राज्य में करीब एक करोड़ वोटर्स के नाम हटाए जाने के मुद्दे पर जारकीहोली ने कहा कि इनमें वे लोग शामिल हैं, जिनकी मौत हो चुकी है, जो कहीं और चले गए हैं या जिनके नाम दो बार दर्ज थे। उन्होंने कहा कि इस तरह का काम अन्य जगहों पर भी होना चाहिए।

पिछले दिनों राज्य चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट जारी की थी, जिसमें से 99.32 लाख नाम हटा दिए गए। इससे राज्य में वोटर्स की संख्या 5.54 करोड़ से घटकर 4.55 करोड़ रह गई। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद और अन्य नेताओं ने इस पर आपत्ति जताई, जबकि जारकीहोली ने SIR प्रक्रिया को सही बताते हुए कहा कि उन्हें इस पर कोई आपत्ति नहीं है।

जारकीहोली के बयान के बाद कांग्रेस के अन्य नेताओं को इस मुद्दे पर सफाई देनी पड़ी। कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने उनके आकलन पर सवाल उठाए और वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-7 आवेदनों में कथित अनियमितताओं की ओर इशारा किया।

खरगे ने कहा, “मुझे नहीं पता कि जारकीहोली के पास किस तरह की जानकारी है। उदाहरण के लिए, चित्तापुर में एक ही बूथ पर एक खास समुदाय के करीब 40 लोगों को निशाना बनाया गया। रिटर्निंग अधिकारियों ने इसकी जांच की तो पता चला कि वहां बड़ी संख्या में पहले से छपे हुए फॉर्म-7 मौजूद थे। किसी को नहीं पता था कि ये कहां से आए हैं। जिस व्यक्ति ने फॉर्म-7 जमा किया था, उसे खुद ही यह जानकारी नहीं थी कि उसने ऐसा क्यों किया। उसने बस इतना कहा कि ‘यह ऊपर से आया है’।”

खरगे ने इसे गहरी साजिश बताते हुए कहा कि इसकी जड़ें हर जगह फैली हुई हैं और यह पूरी तरह केंद्रीकृत है। उन्होंने कहा कि इस मामले की तह तक जाया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि विजयपुरा में कई लोगों को वोटर लिस्ट से नाम हटाने के आवेदनों में गलत तरीके से मृत घोषित कर दिया गया।

खरगे के मुताबिक, विजयपुरा में 40 से 50 से अधिक लोगों को मृत घोषित कर उनके नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 जमा किए गए। उन्होंने कहा कि संबंधित लोगों ने जिलाधिकारी से शिकायत करते हुए दावा किया कि वे जीवित हैं। खरगे ने कहा कि वह कलबुर्गी और राज्य के अन्य हिस्सों में सामने आई घटनाओं के आधार पर अपनी बात रख रहे हैं।

कर्नाटक के एक अन्य मंत्री संतोष लाड ने भी SIR प्रक्रिया की कड़ी आलोचना करते हुए इसे ‘धोखाधड़ी’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया से चुनावों में बीजेपी को फायदा हुआ है। लाड ने कहा कि बैलेट पेपर से हुए चुनावों में बीजेपी ने 28 में से 14 सीटें गंवाईं और वाराणसी में भी उसकी हार हुई। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर SIR निष्पक्ष है, तो चुनावी नतीजों को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब कैसे दिया जाएगा।

वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कर्नाटक में SIR प्रक्रिया ने पार्टी के राजनीतिक विरोधाभास को उजागर किया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की ओर से अनुचित तरीके से निशाना बनाए जाने के बावजूद चुनाव आयोग ने देशभर में वोटर लिस्ट के व्यवस्थित सत्यापन के जरिए उसे मजबूत करने की कोशिश की है।

प्रधान ने कहा कि कांग्रेस शासित कर्नाटक में चुनावी तंत्र के अधिकारियों—ERO, AERO और BLO—द्वारा सत्यापन किए जाने के बाद अंतिम वोटर लिस्ट में पहले की तुलना में करीब एक करोड़ वोटर्स कम हो गए। उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि क्या कांग्रेस अब अपनी ही सरकार के तंत्र पर गड़बड़ी का आरोप लगाएगी या SIR को लोकतंत्र की रक्षा के लिए वैध प्रक्रिया मानेगी। प्रधान ने कांग्रेस पर चुनावी नतीजों के आधार पर प्रक्रिया की चुनिंदा आलोचना करने का आरोप लगाया।

बीजेपी सांसद जगदीश शेट्टार ने भी कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कई नेता SIR की सच्चाई जानते हैं और दावा किया कि इस प्रक्रिया ने केरल में कांग्रेस की मदद की है। उन्होंने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रमेश चेन्नीथला और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने भी SIR के प्रभाव को स्वीकार किया है।

शेट्टार ने कहा कि कर्नाटक में वोटर लिस्ट से 99 लाख से अधिक नाम हटाए जाने का दावा किया जा रहा है। उन्होंने राहुल गांधी और मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को चुनौती दी कि वे ऐसे कम से कम 10 वास्तविक मामले सामने लाएं, जिनमें नाम गलत तरीके से हटाए गए हों। उन्होंने कांग्रेस पर प्रोपेगैंडा करने का आरोप लगाया।

बीजेपी सांसद ने बैलेट पेपर से चुनाव कराने की कांग्रेस की मांग पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में विधान परिषद के चुनावों में एनडीए गठबंधन ने सभी चार सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली। शेट्टार ने दावा किया कि देशभर में भी एनडीए ने लगभग सभी MLC सीटें जीतीं। उन्होंने कहा कि बैलेट पेपर से चुनाव होने के बावजूद कांग्रेस ईवीएम पर सवाल उठाती है और इससे भ्रम पैदा कर रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *