Knews Desk- कानपुर चिड़ियाघर की झील में एक बार फिर बड़ी संख्या में मछलियां मृत मिली हैं। लगातार बारिश के बीच नालों का गंदा पानी झील में पहुंचने से पानी में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने को मछलियों की मौत की प्रमुख वजह माना जा रहा है। इससे पहले 24 जुलाई को भी झील में बड़ी संख्या में मछलियां मरी थीं। इसके बाद 11 अगस्त को दोबारा मछलियों के मरने की घटना सामने आई।
मछलियों की मौत के बाद चिड़ियाघर प्रशासन ने झील में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाने के लिए एरियेटर मशीनें और पंप लगाए हैं। इसके अलावा ऑक्सीजन बढ़ाने वाली ओ-2 मैक्स टैबलेट और पानी में मौजूद विषैले तत्वों को नियंत्रित करने के लिए केमिकल भी डाला जा रहा है।
चिड़ियाघर प्रशासन के मुताबिक, बारिश के दौरान आसपास के नालों का पानी बहकर झील में पहुंच रहा है। एचबीटीयू, बस स्टॉप और डिपो की ओर से आने वाले नालों का पानी भी झील में गिरने की बात सामने आई है। इससे झील के पानी की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ ऑक्सीजन का स्तर भी कम हो रहा है।
पहली घटना के बाद हुई जांच में किदवई नगर की तरफ से आने वाले नाले के ओवरफ्लो होने और उसका पानी झील में मिलने की बात सामने आई थी। इस संबंध में चिड़ियाघर प्रशासन ने नगर निगम को पत्र लिखकर समस्या से अवगत कराया था।
क्षमता से ज्यादा मछलियां भी बनी वजह
जानकारों के अनुसार, झील में मछलियों की संख्या उसकी क्षमता के मुकाबले अधिक हो गई है। नियमित हार्वेस्टिंग नहीं होने से पानी में मछलियों की संख्या बढ़ती गई। ऐसे में बारिश के साथ गंदा पानी पहुंचने और ऑक्सीजन का स्तर गिरने से स्थिति और गंभीर हो गई।
झील के पानी में कौन-कौन से रासायनिक या विषैले तत्व मौजूद हैं, इसका पता लगाने के लिए विशेषज्ञों की टीम से पानी की जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद मछलियों की मौत की वास्तविक वजह को लेकर स्थिति और स्पष्ट होगी।
फिलहाल चिड़ियाघर प्रशासन झील की सफाई कराने के साथ-साथ गंदे पानी के प्रवेश वाले रास्तों को बंद करने की तैयारी कर रहा है। साथ ही पानी का सर्कुलेशन बेहतर करने के लिए पंप और ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने के लिए एरियेटर लगाए जा रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि इन उपायों से झील की स्थिति को जल्द सामान्य करने की कोशिश की जा रही है।