आज है मोहिनी एकादशी का व्रत, इन गलतियों से रहें दूर, तभी मिलेगा व्रत का पूरा पुण्यफल

KNEWS DESK- हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष स्थान है, लेकिन इनमें मोहिनी एकादशी को अत्यंत फलदायी और पापों का नाश करने वाला माना गया है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

पौराणिक कथा: क्यों कहलाती है मोहिनी एकादशी?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय जब देवताओं और असुरों के बीच अमृत को लेकर विवाद हुआ, तब भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया। इस रूप में उन्होंने देवताओं को अमृत पिलाकर उनकी रक्षा की। इसी घटना के कारण इस एकादशी का नाम मोहिनी एकादशी पड़ा।

व्रत के दौरान भूलकर भी न करें ये गलतियां

मोहिनी एकादशी का व्रत अत्यंत नियमों वाला माना जाता है। छोटी-सी चूक भी व्रत के फल को प्रभावित कर सकती है।

चावल का सेवन न करें
इस दिन चावल खाना बड़ा दोष माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से अगले जन्म में निम्न योनि प्राप्त हो सकती है।

तुलसी दल न तोड़ें
भगवान विष्णु को तुलसी प्रिय है, लेकिन एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना वर्जित है। पूजा के लिए पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।

तामसिक भोजन से बचें
लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा का सेवन इस दिन पूरी तरह निषिद्ध है। सात्विक भोजन ही ग्रहण करें।

क्या करें ताकि मिले पूरा पुण्य?

पीले वस्त्र धारण करें
भगवान विष्णु को पीला रंग अत्यंत प्रिय है, इसलिए इस दिन पीले कपड़े पहनना शुभ माना जाता है।

मंत्र जाप और पाठ करें
विष्णु सहस्रनाम का पाठ या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप अत्यंत लाभकारी होता है।

दान-पुण्य करें
ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या जल का दान करना पुण्यदायक माना जाता है।

दीप दान करें
शाम के समय तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाकर परिक्रमा करें, लेकिन जल अर्पित न करें।

मोहिनी एकादशी का आध्यात्मिक महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से व्यक्ति मोह-माया के बंधनों से मुक्त होता है। त्रेतायुग में भगवान श्रीराम और द्वापर युग में युधिष्ठिर ने भी इस व्रत के प्रभाव से अपने कष्टों का निवारण किया था।

ऐसा विश्वास है कि मोहिनी एकादशी का व्रत रखने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि तथा शांति का वास होता है।

मोहिनी एकादशी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का अवसर है। सही नियमों का पालन और श्रद्धा के साथ की गई पूजा व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।