नक्सलवाद खत्म, अब विकास की बारी… बस्तर में बोले अमित शाह

Knews Desk– केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah ने छत्तीसगढ़ के बस्तर दौरे के दौरान बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि अब सुरक्षा कैंपों को “सेवा डेरा” यानी जन सुविधा केंद्रों में बदला जाएगा। बस्तर के नेतानार में अर्धसैनिक बलों के कैंप को सेवा केंद्र में बदलने की शुरुआत की गई। सरकार इसे नक्सलवाद के खात्मे के बाद विकास की नई शुरुआत मान रही है।

आदिवासियों तक पहुंचेगी हर सरकारी सुविधा

अमित शाह ने कहा कि जिन इलाकों में कभी नक्सल हिंसा का डर था, वहां अब विकास और जनसेवा का काम होगा। उन्होंने बताया कि नए सेवा केंद्रों में बैंकिंग, आधार कार्ड, राशन कार्ड और सरकारी योजनाओं से जुड़ी सुविधाएं एक ही जगह मिलेंगी। कॉमन सर्विस सेंटर के जरिए केंद्र और राज्य सरकार की 371 योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि एक साल के भीतर रायपुर से सरकार को सीधे बस्तर के गांवों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि लोगों को छोटे-छोटे काम के लिए शहर न जाना पड़े।

नक्सलवाद खत्म, अब विकास की बारी

गृहमंत्री ने कहा कि बस्तर ने नक्सली हिंसा की भयावह तस्वीर देखी है। उन्होंने बताया कि कभी यहां आईईडी धमाकों में लोगों के पैर तक उड़ जाते थे और बच्चों को स्कूल से उठाया जाता था। लेकिन अब सुरक्षाबलों ने आतंक फैलाने वालों का सफाया कर दिया है। शाह के मुताबिक करीब 3000 नक्सलियों ने सरेंडर किया है। इनमें कई लोग ऐसे हैं जिन्हें पढ़ना-लिखना भी नहीं आता। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की मदद से हजारों लोगों को प्रौढ़ शिक्षा दी जा रही है।

डेयरी और वन उपज से रोजगार पर जोर

अमित शाह ने बस्तर में रोजगार बढ़ाने के लिए डेयरी और वन उपज पर आधारित मॉडल लागू करने की बात कही। उन्होंने बताया कि National Dairy Development Board के सहयोग से हर गांव में डेयरी मॉडल शुरू किया जाएगा और आदिवासी महिलाओं को दो-दो पशु दिए जाएंगे। इसके अलावा वन उपज की पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कोऑपरेटिव मॉडल तैयार किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे आदिवासी परिवारों की आय बढ़ेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

कैंपों का डिजाइन करेगा NID

गृहमंत्री ने बताया कि इन सेवा केंद्रों को बेहतर तरीके से विकसित करने के लिए National Institute of Design को जिम्मेदारी दी जाएगी। बस्तर के करीब 70 कैंपों को चरणबद्ध तरीके से जन सुविधा केंद्रों में बदला जाएगा। उन्होंने कहा कि बस्तर अब हिंसा नहीं, बल्कि विकास और आत्मनिर्भरता के लिए पहचाना जाएगा।

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