Knews Desk– मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट अब पूरी दुनिया के लिए बड़ी चिंता बन गया है। दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में शामिल Strait of Hormuz में रुकावट आने से वैश्विक तेल सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और LNG सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है।
सऊदी, UAE और कतर पर बढ़ा दबाव
होर्मुज संकट के बाद सऊदी अरब, UAE और कतर जैसे बड़े तेल उत्पादक देशों पर उत्पादन और सप्लाई बनाए रखने का भारी दबाव है। हालांकि इन देशों ने वैकल्पिक पाइपलाइन और रेड सी रूट के जरिए तेल भेजने की कोशिश शुरू की है, लेकिन इससे पूरी कमी पूरी नहीं हो पा रही। सऊदी अरब और UAE कुछ मात्रा में तेल को पाइपलाइन के जरिए डायवर्ट कर रहे हैं, फिर भी वैश्विक बाजार में भारी कमी बनी हुई है।
तेजी से घट रहा वैश्विक तेल भंडार
International Energy Agency यानी IEA ने चेतावनी दी है कि दुनिया में कमर्शियल ऑयल रिजर्व तेजी से खत्म हो रहे हैं। एजेंसी के प्रमुख फातिह बिरोल के मुताबिक मार्च और अप्रैल में वैश्विक तेल स्टॉक रिकॉर्ड स्तर तक गिरा है और मौजूदा भंडार सिर्फ कुछ हफ्तों तक ही चल सकता है।
तेल की कीमतों में भारी उछाल
संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली है। Brent Crude 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे, तो कीमतें और बढ़ सकती हैं।
भारत समेत एशियाई देशों पर सबसे ज्यादा असर
भारत, जापान, चीन और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई देश सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि उनकी बड़ी तेल जरूरतें खाड़ी देशों पर निर्भर हैं। IEA के अनुसार 2025 में होर्मुज से गुजरने वाले तेल का लगभग 80 प्रतिशत एशियाई देशों को भेजा गया था।
सप्लाई चेन और शिपिंग पर असर
तेल संकट का असर अब वैश्विक सप्लाई चेन पर भी दिखाई दे रहा है। कई जहाज समुद्री मार्गों में फंसे हुए हैं और शिपिंग कंपनियों ने होर्मुज रूट पर ट्रांजिट सीमित कर दिया है। UAE ने कुछ तेल टैंकरों को ट्रैकिंग सिस्टम बंद करके भेजना शुरू किया है, ताकि हमलों से बचा जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात जल्दी सामान्य नहीं हुए, तो दुनिया को 2026 का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट झेलना पड़ सकता है।