दिल्ली की जेलों में बंद कुख्यात गैंगस्टरों, संगठित अपराधियों और हाई रिस्क अंडरट्रायल कैदियों पर सरकार शिकंजा कसने की तैयारी कर रही है. ऐसे कैदियों को जरूरत के मुताबिक दूसरे राज्यों की जेलों में ट्रांसफर किया जा सकता है.
Knews Desk- दिल्ली सरकार राजधानी की जेलों में बंद कुख्यात गैंगस्टरों और हाई रिस्क अंडरट्रायल कैदियों को लेकर नई रणनीति पर काम कर रही है. सरकार ऐसे कैदियों को जरूरत पड़ने पर दूसरे राज्यों की जेलों में भेजने की तैयारी कर रही है. इसका मकसद जेलों की सुरक्षा बढ़ाने के साथ-साथ जेल के अंदर से संचालित होने वाली आपराधिक गतिविधियों पर रोक लगाना है.
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और जनहित को ध्यान में रखते हुए कुछ हाई रिस्क कैदियों को दूसरे राज्यों की जेलों में स्थानांतरित किया जा सकता है. इसके लिए संबंधित राज्य सरकारों की सहमति या केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी लेने की व्यवस्था होगी.
मौजूदा व्यवस्था में क्या थी दिक्कत?
दिल्ली की जेलों में बड़ी संख्या में कुख्यात अपराधी और गैंगस्टर अंडरट्रायल के तौर पर बंद हैं. सरकार का कहना है कि इनमें से कुछ आरोपी जेल में रहते हुए भी हत्या, रंगदारी, धमकी, गैंगवार और आपराधिक साजिश जैसी गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश कर सकते हैं.
मौजूदा Transfer of Prisoners Act, 1950 के तहत मुख्य रूप से दोषसिद्ध कैदियों को एक जेल से दूसरी जेल में स्थानांतरित करने का प्रावधान था. अंडरट्रायल कैदियों के मामले में दूसरे राज्य की जेल में भेजने को लेकर स्पष्ट कानूनी व्यवस्था नहीं थी.
संशोधित कानून को दिल्ली में लागू करने की तैयारी
इस कानूनी कमी को दूर करने के लिए पंजाब में Transfer of Prisoners (Punjab Amendment) Act, 2025 में बदलाव किया गया था. इस संशोधन को 21 अप्रैल 2025 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली थी. संशोधित कानून सुरक्षा, कानून-व्यवस्था या जनहित जैसे आधारों पर अंडरट्रायल कैदियों को दूसरे राज्य की जेल में भेजने की अनुमति देता है.
अब दिल्ली सरकार इसी व्यवस्था को राजधानी में लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है. जरूरत पड़ने पर न्यायिक प्रक्रिया भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के प्रावधानों के तहत पूरी की जाएगी.
जेल से गैंग चलाने पर लगेगी रोक
सरकार का मानना है कि कुछ हाई प्रोफाइल गैंगस्टर जेल में उपलब्ध संसाधनों और संपर्कों का इस्तेमाल अपने आपराधिक नेटवर्क को मजबूत करने के लिए करते हैं. जेल के अंदर से ही दूसरे अपराधियों और बाहरी नेटवर्क के साथ संपर्क बनाए रखने की कोशिश की जाती है.
ऐसे कैदियों को दिल्ली से बाहर की जेलों में भेजने से उनके स्थानीय नेटवर्क पर असर पड़ सकता है. साथ ही गवाहों को प्रभावित करने, गैंगवार कराने या जेल से आपराधिक गतिविधियां संचालित करने की संभावनाओं को भी कम किया जा सकेगा.
मॉडल जेल कानून में भी है ट्रांसफर का प्रावधान
Model Prison and Correctional Services Act, 2023 में भी कैदियों को एक राज्य से दूसरे राज्य की जेल में स्थानांतरित करने का प्रावधान किया गया है. इसके तहत कुछ परिस्थितियों में अंडरट्रायल कैदियों को भी दूसरे राज्य में भेजा जा सकता है, हालांकि इसके लिए ट्रायल कोर्ट की सहमति जरूरी होती है.
दिल्ली में संशोधित कानून लागू होने के बाद हाई रिस्क अंडरट्रायल कैदियों और गैंगस्टरों के अंतरराज्यीय ट्रांसफर के लिए कानूनी आधार मजबूत हो जाएगा. सरकार को उम्मीद है कि इससे जेलों की सुरक्षा बढ़ेगी, गैंगवार पर लगाम लगेगी और संगठित अपराध के खिलाफ अलग-अलग राज्यों की एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा.