मिडटर्म चुनाव के बाद ट्रंप को बड़ा झटका, भारतीय-अमेरिकी हरमीत ढिल्लों ने दिया इस्तीफा

Knews Desk- अमेरिका में मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को मिली करारी हार के बाद डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन में पहला बड़ा इस्तीफा सामने आया है। भारतीय-अमेरिकी हरमीत ढिल्लों ने अमेरिकी न्याय विभाग के नागरिक अधिकार प्रभाग के प्रमुख पद से इस्तीफा दे दिया है। वह मिडटर्म चुनाव के बाद ट्रंप प्रशासन छोड़ने वाली पहली वरिष्ठ अधिकारी हैं। अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने 5 नवंबर 2026 को उनके इस्तीफे की पुष्टि की।टॉड ब्लांश ने सोशल मीडिया पर हरमीत ढिल्लों के कार्यकाल की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने पूरे दृढ़ विश्वास के साथ नागरिक अधिकार प्रभाग का नेतृत्व किया। उन्होंने हर अमेरिकी की नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा की और बिना किसी डर या पक्षपात के कानून लागू किया। न्याय विभाग ने उनकी सार्वजनिक सेवा के लिए आभार जताते हुए उनके भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं दीं।

हरमीत ढिल्लों ने अप्रैल 2025 में सहायक अटॉर्नी जनरल की जिम्मेदारी संभाली थी और करीब 18-19 महीने तक इस पद पर रहीं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इस्तीफा देने का फैसला उन्होंने चुनावी नतीजे आने से पहले ही कर लिया था। ढिल्लों के मुताबिक, करीब तीन सप्ताह पहले उन्होंने इस्तीफा देने की इच्छा जताई थी, लेकिन व्हाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ सूसी वाइल्स ने उनसे मिडटर्म चुनाव तक पद पर बने रहने का अनुरोध किया था।हरमीत ढिल्लों का जन्म चंडीगढ़ के एक पंजाबी सिख परिवार में हुआ था। उनका परिवार पहले लंदन गया और बाद में अमेरिका में बस गया। न्याय विभाग में नियुक्ति से पहले उन्होंने सैन फ्रांसिस्को में कई वर्षों तक अपनी कानूनी फर्म चलाई। वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की करीबी सहयोगी मानी जाती हैं और ट्रंप के चुनाव प्रचार अभियान में कानूनी सलाहकार के तौर पर भी काम कर चुकी हैं।

इस्तीफे के बाद ढिल्लों ने सोशल मीडिया पर कहा कि नागरिक अधिकारों के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल के रूप में देश की सेवा करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा। उन्होंने अपने कार्यकाल में अवैध DEI यानी विविधता, समानता और समावेशन नीतियों को खत्म करने के लिए काम करने का दावा किया। उन्होंने महिलाओं और लड़कियों के खेलों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी कदम उठाने की बात कही और राष्ट्रपति ट्रंप को अवसर देने के लिए धन्यवाद दिया।ढिल्लों के कार्यकाल में नागरिक अधिकार प्रभाग की प्राथमिकताओं में भी बदलाव देखने को मिला। उन्होंने उस विचारधारा का विरोध किया, जिसे वह ‘वोक विचारधारा’ कहती थीं। उन्होंने हथियार रखने के अधिकार जैसे दक्षिणपंथी मुद्दों का समर्थन किया और अमेरिकी संविधान के दूसरे संशोधन से जुड़े अधिकारों के लिए विभाग में एक अलग प्रभाग भी शुरू किया।

उनके कार्यकाल में नागरिक अधिकार प्रभाग के 75 प्रतिशत से ज्यादा कर्मचारियों ने नौकरी छोड़ दी या उन्हें हटा दिया गया। इसके बाद कई रूढ़िवादी विचारधारा वाले वकीलों को नियुक्त किया गया। हालांकि, नए कर्मचारियों की संख्या और अनुभव पुराने कर्मचारियों की कमी पूरी नहीं कर सके।ढिल्लों ने कई राज्यों में मतदाता सूचियों से गैर-अमेरिकी नागरिकों के नाम हटाने की मांग को लेकर मुकदमे भी दायर किए थे, लेकिन देशभर की अदालतों ने इन मामलों को खारिज कर दिया। अदालतों ने आशंका जताई कि ऐसे प्रयासों से लोगों के मतदान के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं या उनकी निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल हो सकता है। उन्होंने कुछ विश्वविद्यालयों के खिलाफ भी कार्रवाई की, जिन पर यहूदी विरोध और मुख्य रूप से श्वेत छात्रों के साथ भेदभाव के आरोप लगाए गए थे। हालांकि, इन मामलों में न्याय विभाग को अदालतों से अपेक्षित सफलता नहीं मिली।

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