योगी सरकार ने आपदा राहत के मानकों में बड़ा बदलाव किया है। प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वालों के परिवारों को अब चार लाख रुपये की जगह आठ लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके साथ ही फसल, पशुधन और मकान के नुकसान पर मिलने वाली राहत राशि में भी बढ़ोतरी की गई है। नए मानकों के तहत सिंचित क्षेत्र में फसल नुकसान पर किसानों को अब 17 हजार रुपये की जगह 22 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता मिलेगी।
Knews Desk- सरकार ने राज्य आपदा मोचन निधि और राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि के तहत दी जाने वाली सहायता राशि के मानकों में संशोधन किया है। नए प्रावधानों के तहत 1 अप्रैल से 4 नवंबर 2026 तक हुए नुकसान की भरपाई की जाएगी। सरकार के मुताबिक, बढ़ी हुई राहत राशि से प्रदेश के 10 लाख से ज्यादा किसानों को लाभ मिलने का अनुमान है।
संशोधित मानकों में सबसे बड़ा बदलाव प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को मिलने वाली सहायता राशि में किया गया है। अब तक ऐसे मामलों में परिजनों को चार लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाती थी। इसे बढ़ाकर आठ लाख रुपये कर दिया गया है। यानी आपदा में मौत होने पर परिवार को पहले के मुकाबले दोगुनी सहायता राशि मिलेगी।
किसानों को राहत देने के लिए फसल नुकसान पर मिलने वाली सहायता राशि में भी बढ़ोतरी की गई है। सिंचित क्षेत्र में फसल खराब होने पर अब 17 हजार रुपये की जगह 22 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर मिलेंगे। वहीं, वर्षा आधारित यानी असिंचित क्षेत्र में फसल नुकसान पर सहायता राशि 8,500 रुपये से बढ़ाकर 11 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर कर दी गई है। बारहमासी फसलों और कृषि वानिकी के नुकसान पर भी राहत बढ़ाई गई है। इसके तहत अब 22,500 रुपये की जगह 30 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता मिलेगी।
आपदा में पशुओं की मौत होने पर पशुपालकों को मिलने वाली आर्थिक मदद के मानकों में भी संशोधन किया गया है। बड़े पशुओं की मौत पर सहायता राशि 40 हजार रुपये से बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दी गई है। बकरी, भेड़ और सूअर जैसे छोटे पशुओं की मौत पर अब चार हजार रुपये की जगह 5,500 रुपये मिलेंगे। घोड़े और खच्चर जैसे भार ढोने वाले पशुओं की मौत पर सहायता राशि 20 हजार रुपये से बढ़ाकर 25,400 रुपये कर दी गई है। मुर्गीपालन करने वालों को भी राहत दी गई है। आपदा में मुर्गियों की मौत होने पर अब प्रति मुर्गी 100 रुपये की जगह 130 रुपये की सहायता मिलेगी।
रेशम उत्पादन से जुड़े किसानों के लिए भी राहत राशि बढ़ाई गई है। एरी, शहतूत और टसर रेशम उत्पादन में नुकसान होने पर अब छह हजार रुपये की जगह 7,800 रुपये प्रति हेक्टेयर मिलेंगे। वहीं, मूगा रेशम उत्पादन में नुकसान पर सहायता राशि 7,500 रुपये से बढ़ाकर 9,800 रुपये प्रति हेक्टेयर कर दी गई है। अतिवृष्टि के कारण खेतों में जमा गाद हटाने के लिए मिलने वाली सहायता भी बढ़ाई गई है। पहले इसके लिए 18 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर दिए जाते थे, जिसे अब बढ़ाकर 23 हजार रुपये कर दिया गया है। इसी तरह भूस्खलन और हिमस्खलन से कृषि भूमि को नुकसान पहुंचने पर सहायता राशि 47 हजार रुपये से बढ़ाकर 60 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर कर दी गई है।
आपदा प्रभावित परिवारों को राहत शिविरों में 30 दिनों तक सहायता उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। वहीं, सूखे की स्थिति में प्रभावित क्षेत्रों में 90 दिनों तक पेयजल सहायता देने की व्यवस्था भी नए मानकों में शामिल है।
प्राकृतिक आपदा में मकान क्षतिग्रस्त होने पर मिलने वाली सहायता राशि के मानकों में भी बदलाव किया गया है। मैदानी क्षेत्रों में पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकान के लिए 1.85 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। पहाड़ी क्षेत्रों में पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकान के लिए यह राशि 2.06 लाख रुपये निर्धारित की गई है। वहीं, मैदानी क्षेत्रों में आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकान के लिए 93 हजार रुपये की आर्थिक मदद का प्रावधान किया गया है।
आपदा में सार्वजनिक और शैक्षणिक संस्थानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए भी सहायता राशि तय की गई है। प्राथमिक विद्यालयों की मरम्मत के लिए अधिकतम 15.50 लाख रुपये तक की सहायता दी जा सकेगी। वहीं, माध्यमिक विद्यालय, इंटर कॉलेज और पॉलिटेक्निक संस्थानों की मरम्मत के लिए 26 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा सड़क, अस्पताल और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों की मरम्मत के लिए भी सहायता के नए मानक तय किए गए हैं।
योगी सरकार की ओर से संशोधित आपदा राहत मानकों का लाभ 1 अप्रैल से 4 नवंबर 2026 तक हुए नुकसान के मामलों में दिया जाएगा। राहत राशि राज्य आपदा मोचन निधि और राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि के तहत निर्धारित पात्रता और प्रक्रिया के अनुसार मिलेगी। सरकार के इन बदलावों में किसानों के साथ पशुपालकों और आपदा प्रभावित परिवारों को भी राहत देने का प्रावधान किया गया है, खास तौर पर फसल, पशुधन और मकान के नुकसान पर सहायता राशि बढ़ाई गई है।