इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने 27 अक्टूबर को हुए चुनावों के बाद विपक्षी उम्मीदवार गादी आइसेनकोट को सरकार बनाने का पहला मौका दिया है। पूर्व सैन्य प्रमुख आइसेनकोट को सरकार बनाने के लिए 28 दिन का समय मिला है और जरूरत पड़ने पर 14 दिन अतिरिक्त मिल सकते हैं। हालांकि नेसेट में बहुमत जुटाना उनके लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
Knews Desk – राष्ट्रपति इसाक हर्जोग के साथ हुई बातचीत में इजराइल के अधिकांश प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने नई सरकार बनाने की जिम्मेदारी आइसेनकोट को सौंपने का समर्थन किया। अब उनके सामने 120 सदस्यीय नेसेट में कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जुटाने की चुनौती है।
नेतन्याहू-विरोधी गुट के पास 48 सीटें
पिछले चुनाव में नेतन्याहू और उनके सहयोगियों ने संसद में अपना बहुमत खो दिया। वहीं आइसेनकोट के नेतृत्व वाले गुट को भी अपने दम पर बहुमत नहीं मिला। आइसेनकोट के नेतन्याहू-विरोधी गुट के पास 48 सीटें हैं। उनकी ‘याशर’ पार्टी के पास 21, ‘टुगेदर’ के पास 12, ‘द डेमोक्रेट्स’ के पास 8 और ‘यिसरायल बेतेनु’ के पास 7 सीटें हैं।
दो अरब पार्टियों ‘जॉइंट लिस्ट’ और ‘राअम’ के पास 19 सीटें हैं। इन सीटों को जोड़ने पर संख्या 67 तक पहुंचती है। ऐसे में अरब पार्टियां सरकार गठन में अहम भूमिका निभा सकती हैं। हालांकि इन दलों के बीच केवल नेतन्याहू का विरोध ही साझा बिंदु है और अन्य मुद्दों पर उनके बीच मतभेद हैं।
AP न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू ने आइसेनकोट और अरब पार्टियों के बीच संभावित गठबंधन को रोकने के लिए अभियान शुरू किया है। नेतन्याहू ने बिना सबूत यह दावा भी किया कि अरब पार्टियों ने चुनाव ‘चुरा’ लिया है। उन्होंने ‘राष्ट्रीय एकता सरकार’ बनाने का आह्वान करते हुए ऐसी सरकार के खिलाफ चेतावनी दी जिसमें उनके शब्दों में ‘आतंकवादियों के समर्थक’ शामिल हों।
अरब पार्टियों के साथ गठबंधन पर शर्त
आइसेनकोट ने कुछ शर्तों के साथ अरब पार्टियों के साथ गठबंधन की इच्छा जताई है। इनमें हमास को आतंकवादी संगठन के रूप में मान्यता देना और उसे पूरी तरह खत्म करने का समर्थन शामिल है। हालांकि उनके गुट के कुछ सदस्य अरब पार्टियों के बाहरी समर्थन वाली अल्पसंख्यक सरकार के विकल्प को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं।
नेतन्याहू की राजनीति में धार्मिक पार्टियों की भूमिका भी सरकार गठन में अहम मुद्दा है। ये पार्टियां अति-रूढ़िवादी पुरुषों को अनिवार्य सैन्य सेवा से छूट देने की मांग करती हैं। इसके अलावा 7 अक्टूबर के हमलों से जुड़ी विफलताओं की औपचारिक जांच का नेतन्याहू द्वारा विरोध भी एक बड़ा विवादित मुद्दा है।
आइसेनकोट की पार्टी ‘यशार’ ने X पर नेतन्याहू के वीडियो की आलोचना की। पार्टी ने लिकुड के सदस्यों से कट्टरपंथी पार्टियों के साथ गठबंधन तोड़ने की अपील की। पार्टी के मुताबिक, आइसेनकोट उन्हीं पार्टियों और सांसदों के साथ जुड़ेंगे जो उनके सिद्धांतों का समर्थन करते हैं।