KNEWS DESK- UPI से रोजाना पेमेंट करने वाले करोड़ों लोगों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। UPI ट्रांजैक्शन पर चार्ज और मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर चल रही चर्चा के बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि MDR का संबंध मर्चेंट यानी व्यापारियों से है, आम ग्राहकों से नहीं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लागू करने को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
वित्त मंत्री का यह बयान कांग्रेस नेता जयराम रमेश की ओर से उठाए गए सवालों के जवाब में आया है। सीतारमण ने कहा कि MDR लागू होने की स्थिति में इसका भुगतान अंतिम उपभोक्ता से नहीं लिया जाएगा।
आम UPI यूजर्स पर नहीं पड़ेगा MDR का बोझ
निर्मला सीतारमण ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया में स्पष्ट किया कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट का प्रावधान व्यापारियों से संबंधित है। इसका सीधा शुल्क UPI के जरिए भुगतान करने वाले ग्राहकों पर नहीं लगाया जाएगा। यानी अगर कोई व्यक्ति दुकान, रेस्टोरेंट या किसी अन्य मर्चेंट को UPI के जरिए भुगतान करता है तो MDR के नाम पर उससे अतिरिक्त शुल्क लेने की बात फिलहाल नहीं है।
वित्त मंत्री के मुताबिक, MDR से मिलने वाली राशि बैंकों और फिनटेक कंपनियों को डिजिटल पेमेंट के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। इससे टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और डिजिटल सुरक्षा पर ज्यादा निवेश किया जा सकेगा। देश में UPI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। छोटी दुकानों से लेकर बड़े कारोबारी प्रतिष्ठानों तक QR कोड के जरिए भुगतान आम हो चुका है। ऐसे में UPI पर संभावित चार्ज की चर्चा सीधे करोड़ों यूजर्स से जुड़ा मुद्दा बन गई है।
UPI पर MDR लगाने का अभी कोई अंतिम फैसला नहीं
वित्त मंत्री ने एक और महत्वपूर्ण बात स्पष्ट की है कि UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लागू करने का अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि UPI और NPCI की अगुवाई वाली सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी ने इस संबंध में फिलहाल अंतिम फैसला नहीं लिया है। ऐसे में यह कहना कि UPI ट्रांजैक्शन पर नया शुल्क लागू हो चुका है, सही नहीं होगा।
मामले पर आगे की प्रक्रिया संसद में प्रस्तावित Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 से भी जुड़ी हुई है। वित्त मंत्री के अनुसार, MDR से संबंधित चर्चा इस विधेयक के पारित होने के बाद आगे बढ़ सकती है।
नए विधेयक में सरकार को क्या मिलेगा अधिकार?
प्रस्तावित कानून के जरिए केंद्र सरकार को नोटिफिकेशन जारी कर यह निर्धारित करने का अधिकार मिल सकता है कि कौन से इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट माध्यम या किस तरह के डिजिटल ट्रांजैक्शन शुल्क मुक्त रखे जाएंगे। यानी सरकार अलग-अलग डिजिटल पेमेंट सिस्टम को लेकर नियम निर्धारित कर सकेगी। हालांकि, UPI के मामले में आगे क्या व्यवस्था लागू होगी, इस पर अंतिम तस्वीर संबंधित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।
सीतारमण ने कहा कि MDR से बैंकों और फिनटेक कंपनियों को अपने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, नई तकनीक विकसित करने और साइबर सुरक्षा बेहतर करने के लिए संसाधन मिल सकते हैं।
जयराम रमेश के आरोप पर वित्त मंत्री का जवाब
UPI और MDR का मुद्दा कांग्रेस नेता जयराम रमेश के एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद राजनीतिक चर्चा में भी आ गया। जयराम रमेश ने आशंका जताई थी कि MDR जैसी व्यवस्था का आर्थिक बोझ आखिरकार आम लोगों तक पहुंच सकता है। इसके जवाब में निर्मला सीतारमण ने कहा कि MDR मर्चेंट पर लागू होता है, अंतिम ग्राहक पर नहीं। उन्होंने UPI पर चार्ज को लेकर किए जा रहे दावों को भी खारिज किया।
फिलहाल आम UPI यूजर्स के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि सरकार की ओर से ग्राहकों पर MDR लगाने की कोई घोषणा नहीं की गई है। UPI पर MDR को लेकर भी अंतिम निर्णय होना बाकी है। ऐसे में सोशल मीडिया पर UPI पेमेंट पर तुरंत नया चार्ज लगने जैसी चर्चाओं से भ्रमित होने के बजाय आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना जरूरी है। सरकार और संबंधित कमेटी की ओर से अंतिम फैसला होने के बाद ही यह साफ होगा कि व्यापारियों के लिए MDR की व्यवस्था किस रूप में लागू की जाती है और किन डिजिटल ट्रांजैक्शन को पूरी तरह शुल्क मुक्त रखा जाएगा।