Knews Desk– भारत की अर्थव्यवस्था ने पिछले कई दशकों में बड़े बदलाव देखे हैं और इसका असर देश के शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई देता है। खासतौर पर 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद भारतीय शेयर बाजार ने लंबी अवधि में शानदार प्रदर्शन किया। करीब 35 साल पहले Sensex जहां 1,000 के स्तर से नीचे कारोबार कर रहा था, वहीं आज यह करीब 78,000 के आसपास पहुंच चुका है। यानी इस अवधि में Sensex में लगभग 8,500 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह लंबी अवधि में करीब 14 फीसदी सालाना कंपाउंड रिटर्न के बराबर बैठता है।
Sensex की शुरुआत जनवरी 1986 में हुई थी। इसके कुछ ही साल बाद भारत गंभीर आर्थिक संकट से गुजरने लगा। 1991 में देश के पास विदेशी मुद्रा भंडार बेहद कम रह गया था और स्थिति इतनी खराब थी कि उससे केवल कुछ सप्ताह के आयात का खर्च ही चल सकता था। ऐसे समय में तत्कालीन वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने जुलाई 1991 में ऐतिहासिक बजट पेश किया। सरकार ने अर्थव्यवस्था को खोलने, लाइसेंस राज को कम करने, निजी क्षेत्र को बढ़ावा देने और विदेशी निवेश के रास्ते आसान करने जैसे कई बड़े कदम उठाए।
इसी दौर में लिबरलाइजेशन, प्राइवेटाइजेशन और ग्लोबलाइजेशन यानी LPG सुधारों को गति मिली। इन नीतियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसका असर शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया। 1991 के बजट वाले दिन ही Sensex में करीब 5 फीसदी की तेजी देखने को मिली थी। पूरे 1991 में इंडेक्स ने लगभग 82 फीसदी का शानदार रिटर्न दिया और साल के अंत तक यह करीब 1,909 के स्तर पर पहुंच गया।
इसके बाद शेयर बाजार में तेजी का दौर जारी रहा। फरवरी 1992 में डॉ. मनमोहन सिंह के अगले बजट से पहले के करीब सात महीनों में Sensex लगभग 94 फीसदी चढ़ चुका था। हालांकि बाजार की यह तेजी पूरी तरह आर्थिक सुधारों की वजह से नहीं थी। इसी दौर में शेयर बाजार में हर्षद मेहता की गतिविधियों के कारण भी तेज उछाल देखने को मिला। मार्च 1992 में Sensex पहली बार 4,000 के स्तर को पार कर गया।लेकिन यह तेजी ज्यादा समय तक कायम नहीं रही। अप्रैल 1992 में बाजार में बड़ी गिरावट आई और 28 अप्रैल को Sensex करीब 13 फीसदी टूट गया। इसके बाद हर्षद मेहता घोटाला सामने आया, जिसने शेयर बाजार की तेजी पर बड़ा ब्रेक लगा दिया। भारतीय बाजार ने इसके बाद भी कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन आर्थिक सुधारों की प्रक्रिया जारी रही।
लंबी अवधि में भारतीय अर्थव्यवस्था के विस्तार, कंपनियों के बढ़ते कारोबार और निवेशकों की बढ़ती भागीदारी का असर Sensex पर भी पड़ा। 2024 Sensex के लिए बेहद खास साल रहा। इस दौरान इंडेक्स ने पहली बार 75,000, फिर 80,000 और उसके बाद 85,000 के स्तर को पार किया। 2014 में Sensex करीब 25,000 के आसपास था, जबकि 2025 तक यह 86,000 के करीब पहुंच गया।हालांकि बाजार हमेशा एक दिशा में नहीं चलता। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, तेल की कीमतें, भू-राजनीतिक तनाव और तकनीकी बदलाव जैसे AI से जुड़े निवेश बाजार को प्रभावित करते हैं। इसके बावजूद लंबी अवधि में भारतीय शेयर बाजार को लेकर विशेषज्ञों का नजरिया सकारात्मक बना हुआ है। Sensex का 1,000 से करीब 78,000 तक का सफर बताता है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद लंबे समय में कंपाउंडिंग ने निवेशकों के लिए बड़ा अंतर पैदा किया है।