Knews Desk– यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए भीषण स्लीपर बस अग्निकांड ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। हादसे में महोबा के भाजपा जिला कोषाध्यक्ष नीरज गुप्ता की पत्नी सुनीता गुप्ता और उनके बेटे शशांक गुप्ता की भी मौत हो गई। परिजनों के अनुसार, बस में आग लगने और धुआं भरने के बाद सुनीता ने अपने बेटे से कहा था कि वह किसी तरह खिड़की या दरवाजा तोड़कर अपनी जान बचा ले। हालांकि, शशांक ने अपनी मां को अकेला छोड़कर बाहर निकलने के बजाय उनके साथ रहना चुना। आग और जहरीले धुएं की चपेट में आने से दोनों की दर्दनाक मौत हो गई।शशांक गुरुग्राम में इंडिगो एयरलाइंस में इंजीनियर के तौर पर काम करते थे। उनकी मां सुनीता पिछले करीब एक महीने से उनके साथ गुरुग्राम में रह रही थीं। परिवार में एक रिश्तेदार को हार्ट अटैक आने की सूचना मिली थी, जिसके बाद मां-बेटे बस से महोबा लौट रहे थे। दोनों बस की पिछली सीट पर बैठे थे। इसी दौरान यमुना एक्सप्रेसवे पर बस में भीषण आग लग गई।
पुलिस और प्रशासन की कड़ी मशक्कत के बाद हादसे में जान गंवाने वाले सभी 9 यात्रियों की पहचान पूरी कर ली गई है। मृतकों में शशांक गुप्ता और सुनीता गुप्ता के अलावा छतरपुर, मध्य प्रदेश की श्रुति रावत, राठ हमीरपुर के सरोज गुप्ता और मयंक गुप्ता, हिसार के देवेंद्र सहाय भारद्वाज, जालौन के हर शरण गुप्ता, मुस्कुरा हमीरपुर की उषा देवी और नोएडा के ओमप्रकाश शामिल हैं।हादसे के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बस के दो चालकों और परिचालकों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद बस संचालक कंपनी राज कल्पना ट्रैवल्स के मैनेजर विकास को भी गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब हादसे के कारणों की तकनीकी जांच कर रही है।
जांच में बस के एसी और इंजन की स्थिति, इमरजेंसी गेट के काम न करने, बस की फिटनेस और सुरक्षा मानकों के साथ-साथ यात्रियों की शिकायत के बावजूद चालक द्वारा बस को समय पर नहीं रोकने जैसे बिंदुओं को शामिल किया गया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आग किस वजह से लगी और यात्रियों को समय रहते बाहर निकलने का मौका क्यों नहीं मिल पाया।हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शोक जताया है। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया है। हालांकि, अपनों को खो चुके परिवारों का कहना है कि जिंदगी की इस क्षति के सामने मुआवजे की रकम का कोई महत्व नहीं है।पुलिस का कहना है कि जांच में जिस भी अधिकारी या संचालक की लापरवाही सामने आएगी, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हादसे ने एक बार फिर स्लीपर बसों की सुरक्षा, आपातकालीन निकास और फिटनेस मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।