KNEWS DESK- साल 2000 की बात थी। उत्तर प्रदेश की विधान सभा के पीछे की ओर एनेक्सी हुआ करती है। उस समय इसी भवन के पंचम तल पर मुख्यमंत्री कार्यालय था। और, इसके भूतल पर पीछे की ओर पत्रकारों के लिए बैठने का बड़ा सा कमरा था। उसी से सटे हुए रूम में निदेशक सूचना बैठते थे क्योंकि शासन स्तर पर वह यहाँ विशेष सूचना के रूप में बैठते थे।
शाम के लगभग पाँच बज रहे होंगे। मैं एनेक्सी के पोर्टिको से निकल कर अपने ऑफिस जाने के लिए जैसे ही आगे बढ़ा तो दैनिक जागरण के तत्कालीन वरिष्ठ पत्रकार श्री शिव शंकर गोस्वामी ने मुझे आवाज लगाई। बोले, रात को दस बजे तक होटल सरोवर पोर्टिको में आ जाना। साथ खाना खाएँगे और दिल्ली से एच एन शर्मा जी आ रहे हैं। मैं हाँ हूँ कर के निकल गया अपने अख़बार के ऑफिस।
रात को लगभग साढ़े दस बजे शाहनजफ़ रोड पर पूछते पाछते सरोवर पोर्टिको पहुँचा तो रिसेप्शन के बगल डिस्प्ले बोर्ड पर लिखा था, Dinner with Media Persons by H N Sharma (PS to Sri Chandra Shekhar, Hon. Ex PM of India)
और मैं जीने से बेसमेंट के एक खूबसूरत से लाउंज में पहुँचा तो मुश्किल से 12-14 लोग रहे होंगे। शिव शंकर गोस्वामी जी ने मेरा परिचय जिन से कराया तो मुझे लग गया कि यह शर्मा जी ही होंगे। लेकिन उनके साथ दुबले पतले हल्की दाढ़ी वाले एक और सज्जन से भी उन्होंने मेरा परिचय करा दिया। हालांकि मैं उन्हें नहीं जानता था।
राजनीतिक गप शप से लेकर अन्य अन्य विषयों पर बात होने के बीच मैं अलग थलग था क्योंकि बाक़ी सब पत्रकार मुझ से 20 से 30 साल बड़े थे तो मैं खाली सुन ही सकता था। तभी अचानक वो दुबले पतले व्यक्ति मेरे पास आ के बैठ गए। मुझसे बोले, भाई आपका परिचय तो जान गया लेकिन मैं अपना नहीं बता पाया था। फिर हाथ जोड़ कर बोले, राम गोविंद चौधरी हूँ, समाजवादी नेता हूँ, बलिया से हूँ।
बलिया सुनते ही सुखद लगा। मैं बोल उठा कि मेरी ननिहाल भी बलिया में है लेकिन चंद्र शेखर जी के यहाँ से मेरे पिता जी की तरफ़ से कोई रिश्तेदारी है। तो वो पूछे और अगले वाक्य में भाई नहीं था। बल्कि बाबू था। मुझसे राम गोविन्द जी बोले कि तब तो आप जानते होंगे कि चंद्र शेखर जी कौन से ठाकुर हैं। मैंने अनभिज्ञता जताई तो बोले, टिटिहा।
मैं ख़ुद चकरा गया और पूछा कि ये कौन से राजपूत होते हैं तो मुस्कुरा के बोले कि ये तो आप बताइए न। मैंने कहा मुझे सच में नहीं मालूम। पिता जी से पूछूंगा।
फिर घर लौटा तो मुझे लगा कि मेरा सामान्य ज्ञान प्रबल हो गया है। मैंने पिता जी से पूछा कि चंद्र शेखर जी कौन से ठाकुर हैं? पिताजी बोले टिटिहा। अब मैंने कहा कि पहले काहे नहीं बताये आप? मुझे किसी और ने बताया। और पूरा वृतांत सुना दिया। पिता जी हंस के बोले कि राम गोविंद चौधरी सच में खाँटी समाजवादी नेता हैं। ये जय प्रकाश नारायण से लेकर लोहिया वाले असली लोग हैं। चूँकि चंद्र शेखर का बागी रवैया बलिया के लोगों को भाता है इसलिए ये लोग चंद्र शेखर के लोग हैं।
इसके बाद, मुलायम सिंह की सरकार आई तो राम गोविंद जी बेसिक शिक्षा मंत्री बने। सपा के प्रवक्ता में एक थे राजेंद्र चौधरी। एक बार कुछ पत्रकारों में सपा के अंदर नेताओं की जाति को लेकर चर्चा हो रही थी तो उसमें पता चला कि राजेंद्र चौधरी जी जाट हैं। उनके यहाँ से कांधला वाले वीरेंद्र चौधरी जी गूजर हैं और बलिया वाले राम गोविंद चौधरी जी यादव हैं। हालांकि समाजवादी पार्टी देखने में उसके अध्यक्ष राम शरण दास और अहमद हसन तक मैं सीमित रह गया। पर, राम गोविंद चौधरी जब कभी मिलते तो मुस्कुरा कर बोलते थे, और बाबू साहब, नीक बा नू?
इधर बहुत लंबे समय से राम गोविंद जी बहुत अस्वस्थ थे और मैं ने अभी कुछ दिन पहले सोचा था कि मिल आऊँ। और, मैं बस सोचता ही रह गया।
राम गोविंद जी को कोटि कोटि नमन।
श्रद्धांजलि आपको।
— हेमेंद्र प्रताप सिंह तोमर