KNEWS DESK- अयोध्या स्थित हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़े जाने के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कथित बयान को लेकर विवाद बढ़ गया है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए दावा किया है कि हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर कभी नमाज नहीं पढ़ी गई। उन्होंने मुख्यमंत्री के बयान को लेकर सवाल उठाए और इस दावे के प्रमाण सार्वजनिक करने की मांग की।
शंकराचार्य ने कहा कि यदि हनुमानगढ़ी परिसर में कभी ऐसी घटना हुई है तो उसके सबूत सामने रखे जाने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना प्रमाण के इस तरह का दावा अयोध्या की धार्मिक गरिमा को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि हनुमानगढ़ी की परंपरा और धार्मिक महत्व को देखते हुए ऐसे संवेदनशील विषयों पर बयान देने से पहले तथ्यों की पुष्टि जरूरी है।
शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए कहा कि हनुमानगढ़ी में नमाज पढ़े जाने की बात सही नहीं है। उन्होंने दावा किया कि वहां न कभी नमाज हुई और न ही ऐसी किसी गतिविधि की अनुमति दी गई। उन्होंने कहा कि अगर सरकार के पास इससे जुड़े कोई दस्तावेज या प्रमाण हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने इस मुद्दे को राम मंदिर चढ़ावा विवाद से भी जोड़ते हुए कहा कि मंदिर ट्रस्ट से जुड़े मामले की एसआईटी जांच की रिपोर्ट अब तक सामने नहीं आई है। शंकराचार्य ने सवाल उठाया कि जब मुख्यमंत्री ने जांच के बाद स्थिति स्पष्ट करने की बात कही थी, तो अब तक रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई।
शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि पुराने मामलों को सामने लाकर लोगों का ध्यान मौजूदा मुद्दों से हटाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि पहले लंबित जांचों के निष्कर्ष सामने आने चाहिए और उसके बाद ही किसी अन्य विषय पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री के बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि अयोध्या और हनुमानगढ़ी करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े धार्मिक स्थल हैं। ऐसे स्थानों को राजनीतिक विवादों से दूर रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक भावनाओं से जुड़े विषयों पर बिना ठोस प्रमाण के बयान देना उचित नहीं है।
शंकराचार्य ने हनुमानगढ़ी की आठों पट्टियों के महंतों से भी इस मामले पर विचार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों की मर्यादा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है और आस्था से जुड़े मामलों में सावधानी बरती जानी चाहिए। वहीं, इस विवाद पर पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि हनुमानगढ़ी में कभी नमाज नहीं पढ़ी गई। उन्होंने इस दावे को गलत बताते हुए कहा कि जो लोग ऐसी बात कह रहे हैं, उन्हें तथ्यों की जानकारी होनी चाहिए।
बृजभूषण ने कहा कि हनुमानगढ़ी के इतिहास और निर्माण से जुड़े कई तथ्य हैं, जिन पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि मंदिर निर्माण से जुड़े ऐतिहासिक पहलुओं को समझे बिना इस तरह के बयान देना उचित नहीं है। फिलहाल हनुमानगढ़ी में नमाज के दावे को लेकर राजनीतिक और धार्मिक बहस तेज हो गई है। एक ओर जहां शंकराचार्य और अन्य नेताओं ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं, वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। अब इस मामले में प्रमाण और आधिकारिक स्पष्टीकरण पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।