शांत दिखने वाला हाथी कब हो जाता है खतरनाक? जानिए आक्रामक होने के पीछे की बड़ी वजहें

हाथियों को बेहद समझदार और संवेदनशील जीव माना जाता है, लेकिन कई परिस्थितियों में उनका व्यवहार अचानक आक्रामक हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक बचपन का trauma, इंसानी दखल, जंगलों का सिकुड़ता दायरा और नर हाथियों में मस्ट जैसी स्थितियां इसके पीछे अहम कारण हो सकती हैं।

Knews Desk- हाथी अपनी बुद्धिमत्ता, मजबूत याददाश्त और संवेदनशील स्वभाव के लिए दुनियाभर में पहचाने जाते हैं। इसके बावजूद कई बार यही विशालकाय जीव इंसानों के लिए जानलेवा साबित हो जाते हैं। जंगली हाथियों के साथ-साथ पालतू हाथियों के आक्रामक होने की घटनाएं भी समय-समय पर सामने आती रही हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर शांत नजर आने वाला हाथी कब और किन परिस्थितियों में खतरनाक हो जाता है।

वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक हाथियों के व्यवहार को समझने के लिए उनके प्राकृतिक स्वभाव के साथ-साथ उनके आसपास के माहौल को भी समझना जरूरी है।

पुरानी यादें भी बदल सकती हैं हाथी का व्यवहार

प्रसिद्ध वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर दीप रजवार के मुताबिक हाथियों की याददाश्त बेहद मजबूत होती है। अगर किसी हाथी को कम उम्र में अपने झुंड से अलग होना पड़े या उसे किसी तरह का दर्दनाक अनुभव झेलना पड़े, तो उसका असर लंबे समय तक उसके व्यवहार पर रह सकता है।

ऐसे अनुभवों से पैदा हुआ तनाव आगे चलकर उसके स्वभाव में आक्रामकता के रूप में दिखाई दे सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि हाथी भले ही शांत दिखाई दे, लेकिन वह मूल रूप से एक जंगली जानवर है और किसी खतरे या तनाव की स्थिति में उसका प्राकृतिक व्यवहार सामने आ सकता है।

इंसानों का बढ़ता दखल भी बड़ी वजह

हाथियों के आक्रामक होने के पीछे सिर्फ उनकी मानसिक स्थिति या स्वभाव ही जिम्मेदार नहीं है। उनके प्राकृतिक आवास में बढ़ती इंसानी गतिविधियां भी मानव-हाथी संघर्ष को बढ़ा रही हैं।

दीप रजवार के अनुसार जंगलों के आसपास तेजी से बढ़ते रिसॉर्ट, भारी यातायात और लगातार हो रहा निर्माण हाथियों के प्राकृतिक जीवन को प्रभावित कर रहा है। इससे उनके भीतर तनाव बढ़ सकता है और इंसानों के साथ टकराव की आशंका भी बढ़ जाती है।

वन्यजीव प्रेमी हिमांशु तिरुवा का कहना है कि हाथियों के पारंपरिक रास्ते यानी एलिफेंट कॉरिडोर लगातार प्रभावित हो रहे हैं। हाईवे, जंगलों की कटाई और दूसरी विकास परियोजनाओं के कारण हाथियों के पुराने आवागमन मार्ग बाधित हो रहे हैं।

जब हाथियों को अपने पारंपरिक रास्तों पर इंसानी बस्तियां, सड़कें या दूसरी बाधाएं मिलती हैं, तो उनका इंसानों से सामना होने की संभावना बढ़ जाती है। यही स्थिति आगे चलकर मानव-हाथी संघर्ष का कारण बन सकती है।

पालतू हाथी भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं

विशेषज्ञों के मुताबिक किसी हाथी को पालतू बनाए जाने का मतलब यह नहीं है कि उसका जंगली स्वभाव पूरी तरह खत्म हो गया है। खासकर नर हाथियों में मस्ट की स्थिति बेहद महत्वपूर्ण होती है।

मस्ट के दौरान नर हाथियों के शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिसकी वजह से उनकी आक्रामकता काफी बढ़ सकती है। इस दौरान उनका व्यवहार सामान्य समय से बिल्कुल अलग हो सकता है। ऐसे में वर्षों से उनकी देखभाल करने वाला महावत भी मुश्किल स्थिति में पड़ सकता है।

कॉर्बेट में कैसे संभाले जाते हैं हाथी?

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला के मुताबिक रिजर्व में विभागीय हाथियों का इस्तेमाल एंटी-पोचिंग अभियान, जंगल की गश्त और रेस्क्यू ऑपरेशन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में किया जाता है।

उन्होंने बताया कि मस्ट के समय हाथियों को संभालना चुनौतीपूर्ण जरूर होता है, लेकिन प्रशिक्षित महावत और वनकर्मी उनके व्यवहार को समझते हुए विशेष सावधानी बरतते हैं। अनुभव और उचित प्रबंधन के जरिए विभागीय हाथियों का इस्तेमाल वन्यजीव संरक्षण से जुड़े अभियानों में सुरक्षित तरीके से किया जाता है।

हाथियों के रास्ते बचाना जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि हाथियों के आक्रामक व्यवहार को केवल उनके स्वभाव या जैविक कारणों से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। उनके प्राकृतिक आवास में बढ़ता मानवीय हस्तक्षेप भी इस समस्या का अहम हिस्सा है।

अगर हाथियों के एलिफेंट कॉरिडोर को सुरक्षित रखा जाए, जंगलों की कटाई पर नियंत्रण हो और विकास परियोजनाओं की योजना वन्यजीवों के आवागमन को ध्यान में रखकर बनाई जाए, तो मानव-हाथी संघर्ष को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

यानी हाथी कब आक्रामक होगा, इसे समझने के लिए उसके व्यवहार के साथ-साथ उसके आसपास बदल रहे पर्यावरण को समझना भी उतना ही जरूरी है।

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