कानपुर किडनी कांड: अवैध ट्रांसप्लांट के बाद एक और महिला की हुई थी मौत, पुलिस पूछताछ में आरोपी मुदस्सर ने दी जानकारी, अबतक 11 आरोपी गिरफ्तार

शिव शंकर सविता- कानपुर में सामने आए अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट ने अब और भी गंभीर रूप ले लिया है। मामले में एक और महिला की मौत का खुलासा हुआ है, जिससे पूरे नेटवर्क की भयावहता सामने आ गई है। यह चौंकाने वाली जानकारी आरोपी मुदस्सर अली सिद्दीकी ने पुलिस पूछताछ के दौरान दी है। पुलिस को इससे पहले भी एक ऑडियो क्लिप के जरिए महिला की मौत की जानकारी मिली थी, जिसमें शिवम अग्रवाल और नवीन पांडेय के बीच बातचीत सामने आई थी। अब दूसरी महिला की मौत की पुष्टि होने के बाद पुलिस दोनों पीड़ितों की पहचान और पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुट गई है।

11 आरोपी पहले ही पहुंच चुके हैं जेल

इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। इनमें डॉ. सुरजीत सिंह, डॉ. प्रीति आहूजा, शिवम अग्रवाल, नवीन पांडेय समेत कई अन्य नाम शामिल हैं। यह नेटवर्क कथित तौर पर गरीब और जरूरतमंद लोगों को लालच देकर अवैध किडनी ट्रांसप्लांट कराता था।

पूछताछ में खुली परतें

पुलिस पूछताछ में मुदस्सर अली ने दावा किया कि उसने 12वीं के बाद ओटी टेक्नीशियन का कोर्स किया और दिल्ली के एक बड़े अस्पताल में काम करते हुए सर्जरी की बारीकियां सीखी। उसने यह भी कहा कि वहीं से उसने किडनी ट्रांसप्लांट करना सीखा। हालांकि, पुलिस अधिकारियों को उसके इस दावे पर पूरी तरह भरोसा नहीं है। उन्हें शक है कि इस पूरे रैकेट के पीछे कोई अनुभवी सर्जन या विशेषज्ञ भी शामिल हो सकता है, जो अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर है।

20 लाख में ‘ट्रांसप्लांट का सौदा’

जांच में सामने आया है कि मुदस्सर अली एक किडनी ट्रांसप्लांट के लिए करीब 20 लाख रुपये तक लेता था। उसने पूछताछ में करीब 10 ट्रांसप्लांट करने की बात स्वीकार की है। पुलिस के अनुसार, 2025 में हुए एक ऑपरेशन के बाद एक महिला की हालत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई। इसके अलावा, 29 मार्च को केशवपुरम स्थित एक अस्पताल में भी संदिग्ध ट्रांसप्लांट किया गया था, जिसमें मुजफ्फरनगर की पारुल तोमर को बेगूसराय के एक युवक की किडनी लगाई गई थी। ऑपरेशन के बाद दोनों को अलग-अलग नर्सिंग होम में शिफ्ट कर दिया गया, जिससे पूरे मामले पर और संदेह गहरा गया। जांच में यह भी सामने आया है कि मुदस्सर अली की मुलाकात 2018 में रोहित तिवारी से हुई थी, जिसने उसे मेरठ के एक अस्पताल में काम दिलाया। वहीं से यह नेटवर्क धीरे-धीरे फैलता गया और बाद में कानपुर तक सक्रिय हो गया।

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