KNEWS DESK- मोमोज आज भारत के सबसे लोकप्रिय स्ट्रीट फूड्स में से एक बन चुके हैं। दिल्ली से लेकर मुंबई, लखनऊ से लेकर चेन्नई तक हर शहर में मोमोज के दीवानों की लंबी कतारें देखने को मिल जाती हैं। लेकिन स्वाद के साथ-साथ इसे लेकर कई तरह की बातें भी सुनने को मिलती हैं। सबसे आम सवाल यह है कि क्या मोमोज में इस्तेमाल होने वाला मैदा आंतों में चिपक जाता है और पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचाता है?

क्या सचमुच आंतों में चिपक जाता है मैदा?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि हमारे शरीर का पाचन तंत्र भोजन को तोड़ने और पचाने के लिए विशेष एंजाइम्स और पेट के एसिड का उपयोग करता है। ऐसे में मैदा या उससे बनी कोई भी चीज सामान्य परिस्थितियों में आंतों की दीवारों पर जाकर चिपकती नहीं है।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि मैदा पूरी तरह नुकसान रहित है। जरूरत से ज्यादा मात्रा में मैदा से बनी चीजें खाने से पाचन संबंधी समस्याएं जरूर बढ़ सकती हैं।
ज्यादा मोमोज खाने से क्या हो सकते हैं नुकसान?
मोमोज का बाहरी आवरण मुख्य रूप से मैदा से तैयार किया जाता है, जिसमें फाइबर की मात्रा बेहद कम होती है। इसी कारण अधिक सेवन करने पर कब्ज, गैस, पेट फूलना और एसिडिटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बार-बार मैदा आधारित खाद्य पदार्थ खाने से पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है और गट हेल्थ प्रभावित हो सकती है।
वजन बढ़ने का भी रहता है खतरा
स्टीम्ड मोमोज अपेक्षाकृत हल्के माने जाते हैं, लेकिन तंदूरी, फ्राइड, चीज या मेयोनीज वाले मोमोज में कैलोरी और फैट की मात्रा काफी अधिक होती है। इनके नियमित सेवन से वजन बढ़ने और पेट के आसपास अतिरिक्त चर्बी जमा होने का खतरा बढ़ सकता है।
ब्लड शुगर पर भी पड़ सकता है असर
मैदा रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट की श्रेणी में आता है। इसका अधिक सेवन ब्लड शुगर लेवल को तेजी से बढ़ा सकता है। यही वजह है कि डायबिटीज या प्रीडायबिटीज से जूझ रहे लोगों को सीमित मात्रा में ही इसका सेवन करने की सलाह दी जाती है।
मोमोज खाने का सही तरीका

अगर आप मोमोज पसंद करते हैं तो इन्हें पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है। बस मात्रा पर नियंत्रण रखें, स्टीम्ड मोमोज को प्राथमिकता दें और साथ में सलाद या फाइबर युक्त भोजन का सेवन करें। इससे स्वाद का आनंद भी मिलेगा और पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव भी नहीं पड़ेगा।
मोमोज का मैदा आंतों में चिपक जाता है, इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। लेकिन अधिक मात्रा में मैदा और हाई-कैलोरी मोमोज का सेवन पाचन, वजन और ब्लड शुगर से जुड़ी समस्याओं को बढ़ा सकता है। इसलिए संतुलित मात्रा में सेवन करना ही सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है।