Knews Desk- खालिस्तान कमांडो फोर्स से जुड़े बताए जाने वाले सुखविंदर सिंह ढिल्लो को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है। मामला साल 1993 में नोएडा में दर्ज आर्म्स एक्ट केस से जुड़ा है। करीब 31 साल बाद फरवरी 2026 में यूपी एटीएस और नोएडा पुलिस ने उसे पंजाब से गिरफ्तार किया था। साल 1995 में अदालत में पेश नहीं होने के बाद उसे फरार घोषित किया गया था और उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1993 के आर्म्स एक्ट मामले में सुखविंदर सिंह ढिल्लो को जमानत देने का आदेश दिया है। सुखविंदर को खालिस्तान कमांडो फोर्स से जुड़ा ऑपरेटिव बताया गया है। वह मूल रूप से पंजाब के कपूरथला का रहने वाला है।
सुखविंदर के खिलाफ उत्तर प्रदेश के नोएडा में 1993 में मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में लंबे समय तक अदालत में पेश नहीं होने के कारण उसे फरार घोषित कर दिया गया था। इसके बाद उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी जारी हुआ। यूपी एटीएस और नोएडा पुलिस ने 18 फरवरी 2026 को उसे पंजाब से गिरफ्तार किया था।
कोर्ट ने जमानत देते हुए क्या कहा?
मामले की सुनवाई जस्टिस कृष्ण पहल की सिंगल बेंच ने की। उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा नहीं लगता कि आरोपी ने पहले मिली स्वतंत्रता का दुरुपयोग किया था। कोर्ट ने यह भी माना कि उसके जानबूझकर कानून से बचने के लिए फरार रहने की बात प्रथम दृष्टया स्थापित नहीं होती है। इसके बाद अदालत ने उसे जमानत देने का आदेश दिया।
पुलिस के मुताबिक, सुखविंदर सिंह ढिल्लो को इससे पहले 18 अप्रैल 1993 को नोएडा पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उस समय पुलिस ने उसके पास से एक AK-56 राइफल और 121 कारतूस बरामद करने का दावा किया था।
इस मामले में स्थानीय अदालत ने 9 दिसंबर 1993 को उसे जमानत दे दी थी। हालांकि अगस्त 1995 के बाद वह अदालत में पेश नहीं हुआ। इसके बाद उसे फरार घोषित किया गया और गिरफ्तारी के लिए गैर-जमानती वारंट जारी किया गया।
सुखविंदर सिंह ढिल्लो को दयाल सिंह, राकेश शर्मा और छिंदा जैसे दूसरे नामों से भी जाना जाता है।
पंजाब में भी दर्ज हैं पुराने मामले
रिपोर्ट्स के अनुसार, सुखविंदर के खिलाफ पंजाब में भी कई पुराने आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं। इनमें कपूरथला में 1992 और जालंधर में 1984 के हत्या के मामले शामिल बताए गए हैं।
इसके अलावा फगवाड़ा में 1985 में हत्या के प्रयास और एक लोक सेवक पर हमले से जुड़े मामले का भी जिक्र है। कपूरथला में 1983 और 1987 में सार्वजनिक जुआ अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में भी उसका नाम सामने आया था।
फिलहाल 1993 के आर्म्स एक्ट से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद सुखविंदर सिंह ढिल्लो को बड़ी कानूनी राहत मिली है।