मैसूर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वामी विवेकानंद कल्चरल यूथ सेंटर ‘विवेका स्मारक’ का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने भारत की युवा शक्ति की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि आज देश के युवा स्टार्टअप, सेमीकंडक्टर, डिजिटल टेक्नोलॉजी से लेकर अंतरिक्ष तक नए अध्याय लिख रहे हैं।
Knews Desk- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कर्नाटक के मैसूर में स्वामी विवेकानंद कल्चरल यूथ सेंटर ‘विवेका स्मारक’ का उद्घाटन किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों, युवा शक्ति और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर जोर दिया।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत आज जिन क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है, उसके पीछे देश के युवाओं की प्रतिभा और सामर्थ्य की बड़ी भूमिका है। भारत सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में नई यात्रा शुरू कर चुका है। देश दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है और मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग में भी भारत दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समय भारत का युवा गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था, लेकिन आज वही युवा दुनिया के विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भारत में तैयार किए जा रहे डिजिटल सॉल्यूशंस कई देशों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज भारत के युवाओं की पहुंच अंतरिक्ष तक है और वे लगातार नए अध्याय लिख रहे हैं। देश की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और तकनीकी उपलब्धियों में युवा शक्ति का बड़ा योगदान है।
पीएम मोदी ने स्वामी विवेकानंद को याद करते हुए कहा कि वे युवाओं की शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का मजबूत आधार मानते थे। उन्होंने भारतीय चेतना और शास्त्रों के संदेश को अपने जीवन में आत्मसात किया था। उनका मानना था कि सच्चा जीवन वही है, जो दूसरों की सेवा के लिए समर्पित हो।
प्रधानमंत्री ने स्वामी विवेकानंद के संदेश ‘शिव ज्ञाने, जीव सेवा’ का उल्लेख करते हुए कहा कि जीव की सेवा ही शिव की सेवा है। उन्होंने कहा कि विवेका स्मारक ऐसे युवाओं के निर्माण का केंद्र बने, जिनके लिए समाज और राष्ट्र का हित सर्वोपरि हो और ‘राष्ट्र प्रथम’ उनके जीवन का मूल मंत्र बने।
स्वामी विवेकानंद के जीवन में मैसूर का खास स्थान
पीएम मोदी ने कहा कि करीब 130 साल पहले स्वामी विवेकानंद एक युवा संन्यासी के रूप में मैसूर आए थे। उस समय उनकी प्रसिद्धि आज जैसी नहीं थी, लेकिन उनके विचार बेहद ऊंचे थे। मैसूर के तत्कालीन महाराजा उन लोगों में शामिल थे, जिन्होंने स्वामी विवेकानंद की प्रतिभा और विचारों को पहचाना तथा उनका सहयोग किया।
उन्होंने बताया कि अमेरिका प्रवास के दौरान स्वामी विवेकानंद ने मैसूर के तत्कालीन महाराजा को पत्र लिखकर उनके सहयोग का उल्लेख भी किया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी व्यक्ति का महान व्यक्तित्व बनना अचानक संभव नहीं होता। इसके पीछे वर्षों की साधना, संघर्ष और तपस्या होती है।
‘विवेका स्मारक युवाओं को देगा नई दिशा’
प्रधानमंत्री मोदी ने श्री रामकृष्ण आश्रम के सामाजिक कार्यों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत कार्यों के जरिए आश्रम ने स्वामी विवेकानंद की विरासत को जीवंत रखा है।
पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि ‘विवेका स्मारक’ युवाओं को राष्ट्र सेवा और समाज सेवा की प्रेरणा देने के साथ साधकों और श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक उत्थान का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।