उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय ने अयोध्या में पंचायत आजतक के मंच से समाजवादी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल होने के फैसले पर खुलकर बात की। करीब 30 साल तक सपा में रहने वाले पांडेय ने कहा कि भगवान राम किसी राजनीतिक दल के नहीं हैं और आस्था से जुड़े मुद्दों पर समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने अयोध्या, रामचरितमानस, सनातन परंपरा, पीडीए और ब्राह्मण समाज से जुड़े मुद्दों पर भी सपा पर निशाना साधा।
Knews Desk – मनोज पांडेय ने सपा छोड़ने की वजह बताते हुए विधानसभा की उस घटना का जिक्र किया, जब अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन करने के इच्छुक विधायकों के लिए विधानसभा की ओर से व्यवस्था करने का प्रस्ताव आया था। पांडेय के मुताबिक, उन्होंने इस प्रस्ताव पर सहमति जताई थी, लेकिन बाद में अखिलेश यादव ने सदन में कहा कि सपा का कोई विधायक अयोध्या दर्शन के लिए नहीं जाएगा। पांडेय ने कहा कि भगवान राम किसी एक राजनीतिक दल के नहीं हैं और किसी राजनीतिक दल को लोगों को धार्मिक स्थल पर जाने से रोकना उचित नहीं है।
राम और सनातन को लेकर पार्टी में उठे सवाल
पांडेय ने आरोप लगाया कि सपा में रहते हुए उन्होंने ऐसी कई बातें देखीं, जिनसे उनकी आस्था को ठेस पहुंची। उन्होंने पार्टी के महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोगों की ओर से भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाने, माता सीता को लेकर कथित अभद्र टिप्पणियों और पवित्र नदियों के धार्मिक महत्व पर सवाल उठाए जाने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गंगा, सरयू, यमुना और त्रिवेणी संगम करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े हैं और इनसे जुड़ी मान्यताओं का अपमान स्वीकार नहीं किया जा सकता।
मनोज पांडेय ने रामचरितमानस से जुड़े विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि गोस्वामी तुलसीदास की यह रचना करोड़ों लोगों की आस्था का विषय है। उन्होंने कहा कि इसका अपमान करना या इसकी प्रतियां फाड़ना उचित नहीं है। पांडेय ने यह भी सवाल उठाया कि अगर किसी राजनीतिक दल में महत्वपूर्ण पद पर बैठा व्यक्ति ऐसी टिप्पणी करता है तो पार्टी नेतृत्व की जिम्मेदारी है कि वह उसका विरोध करे और सार्वजनिक रूप से अपनी आपत्ति दर्ज कराए।
अखिलेश के रामलला दर्शन पर बोले- मुझे आपत्ति नहीं
अखिलेश यादव के अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन करने को लेकर मनोज पांडेय ने कहा कि उन्हें किसी के भी दर्शन करने पर आपत्ति नहीं है। उनके मुताबिक भगवान राम सबके हैं और राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। हालांकि उन्होंने सवाल उठाया कि जब पहले अयोध्या जाने और दर्शन करने को लेकर आपत्ति जताई गई थी, तो अब दर्शन की बात क्यों की जा रही है। उन्होंने कहा कि आस्था को राजनीतिक सुविधा के हिसाब से अपनाया या छोड़ा नहीं जा सकता।
मनोज पांडेय ने समाजवादी पार्टी के पीडीए के नारे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पीडीए की परिभाषा को लेकर अलग-अलग बातें कही जाती हैं। पांडेय ने दावा किया कि एक तरफ पार्टी में पीडीए के नाम पर पंडितों को शामिल करने की बात कही जाती है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के बड़े पदों पर बैठे लोगों की ओर से ब्राह्मण समाज को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की जाती हैं। उन्होंने इसे दोहरा रवैया बताया।
राम और कृष्ण को राजनीति में बांटने से बचने की अपील
बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के राम और कृष्ण को लेकर दिए गए बयान और अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया पर भी पांडेय ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भगवान राम और कृष्ण को आपस में बांटने या उनके नाम पर ब्रज और अवध के बीच विवाद खड़ा करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। उन्होंने भारत में भक्ति की अलग-अलग परंपराओं और सूरदास-कबीरदास जैसे संतों का भी जिक्र किया।
राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मुद्दे पर मनोज पांडेय ने सपा पर निशाना साधा। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की। पांडेय ने कहा कि अपराध होना और अपराध के खिलाफ तत्काल प्रभावी कार्रवाई करना दो अलग बातें हैं। उन्होंने 2017 से पहले के उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था से जुड़ी घटनाओं का जिक्र करते हुए मौजूदा सरकार में सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होने का दावा भी किया।
ब्राह्मण समाज को लेकर भी दिया बयान
ब्राह्मणों की नाराजगी के सवाल पर पांडेय ने कहा कि ब्राह्मण भी दूसरे वर्गों की तरह अपनी अपेक्षाएं और आकांक्षाएं रखते हैं। उन्होंने दावा किया कि ब्राह्मण समाज बीजेपी के साथ मजबूती से खड़ा है और आगे भी रहेगा। उन्होंने सपा के एक अधिकृत पदाधिकारी की ओर से ब्राह्मणों को लेकर की गई टिप्पणी का जिक्र करते हुए कहा कि इससे समाज के लोग आज भी आहत हैं।
2027 विधानसभा चुनाव में ऊंचाहार सीट से चुनाव लड़ने के सवाल पर मनोज पांडेय ने कहा कि ऊंचाहार उनकी प्राथमिकता है और वह यहीं से चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि ऊंचाहार उनके लिए सिर्फ चुनाव जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि सेवा, सम्मान और लोगों को अधिकार दिलाने की कर्मभूमि है।
यूजीसी के नए नियमों को लेकर मनोज पांडेय ने कहा कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया है कि किसी भी जाति या वर्ग के युवाओं के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए जल्द ही एक समिति गठित की जाएगी, जो सभी वर्गों के हितों का ध्यान रखेगी।