Knews Desk – स्टूडेंट-एक्टिविस्ट आकृति चौधरी से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को उत्तर प्रदेश सरकार अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने जा रही है। हाई कोर्ट ने आकृति चौधरी को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में रखने के मामले में गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम और अन्य अधिकारियों की कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई थी। अदालत ने 5 लाख रुपये के मुआवजे का आदेश देते हुए इसकी भरपाई संबंधित अधिकारियों की सैलरी से करने की बात कही थी।
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ अपील दाखिल की जाएगी। सरकार का यह कदम हाई कोर्ट के उस फैसले के बाद सामने आया है, जिसमें अदालत ने आकृति चौधरी की NSA के तहत हिरासत को रद्द कर दिया था।
क्या है आकृति चौधरी का मामला?
आकृति चौधरी को अप्रैल 2026 में नोएडा में हुए मजदूरों के विरोध-प्रदर्शन से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस और प्रशासन की ओर से उन पर प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने सहित कई आरोप लगाए गए थे। बाद में उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA के तहत कार्रवाई की गई।
आकृति करीब पांच महीने तक हिरासत में रहीं। इसके बाद मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचा। अदालत ने NSA के तहत उनकी हिरासत के लिए प्रशासन की ओर से पेश किए गए आधार और दस्तावेजों की जांच की। कोर्ट को कार्रवाई के समर्थन में पर्याप्त और ठोस सामग्री नहीं मिली।
हाई कोर्ट ने प्रशासन पर जताई नाराजगी
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आकृति चौधरी की हिरासत को रद्द करते हुए प्रशासन की कार्रवाई पर गंभीर टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि हिरासत के आधार पर्याप्त सबूतों पर आधारित नहीं थे और उनमें कई बातें महज अटकलों पर टिकी हुई थीं।
कोर्ट ने इस मामले को सिर्फ एक सामान्य प्रशासनिक गलती नहीं माना। अदालत ने अधिकारियों की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों के सर्विस रिकॉर्ड में भी इस नाराजगी को दर्ज करने का निर्देश दिया।
अधिकारियों की सैलरी से वसूला जाना था मुआवजा
हाई कोर्ट ने आकृति चौधरी को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। साथ ही अदालत ने निर्देश दिया कि इस राशि की भरपाई उन अधिकारियों से की जाए, जो इस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार थे। इसी के तहत गौतमबुद्ध नगर की डीएम मेधा रूपम समेत संबंधित अधिकारियों की सैलरी से रकम वसूलने का आदेश दिया गया था।
अब उत्तर प्रदेश सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है। सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई के दौरान सरकार हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपनी दलीलें रखेगी। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर होगी कि शीर्ष अदालत इस मामले में हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखती है या इसमें कोई बदलाव करती है।