बेटा जेल में, बहू जमानत पर… विनीत मिनोचा की करोड़ों की संपत्ति का वारिस कौन? समझिए कानून

कानपुर के कारोबारी विनीत मिनोचा की हत्या के बाद उनकी करोड़ों की संपत्ति के उत्तराधिकार को लेकर सवाल उठ रहे हैं। बेटा सुब्रत हत्या की साजिश के आरोप में जेल में है, जबकि बहू शालू जमानत पर बाहर है। ऐसे में जानिए दोष साबित होने या बरी होने की स्थिति में संपत्ति पर किसका अधिकार बन सकता है।

Knews Desk– कानपुर के दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड के बाद अब उनकी करोड़ों रुपये की संपत्ति के उत्तराधिकार को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। इस मामले में विनीत की बहू शालू को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था, लेकिन 21 दिन बाद उसे जमानत मिल गई। वहीं उनके इकलौते बेटे सुब्रत मिनोचा को वारदात के 19 दिन बाद गिरफ्तार किया गया और वह फिलहाल जेल में है। पुलिस ने उस पर हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया है और पूछताछ के दौरान उसके जुर्म कबूल करने की बात भी सामने आई है।

विनीत मिनोचा शहर के बड़े दवा कारोबारियों में शामिल थे। उनके कारोबार का सालाना टर्नओवर करीब 60 से 70 करोड़ रुपये बताया गया है। ऐसे में स्वाभाविक तौर पर यह सवाल उठ रहा है कि उनकी हत्या के बाद उनकी संपत्ति और कारोबार का उत्तराधिकारी कौन होगा। खास तौर पर तब, जब उनका इकलौता बेटा ही हत्या के मामले में आरोपी है।

यह समझना जरूरी है कि किसी व्यक्ति के केवल आरोपी होने से उसका संपत्ति पर उत्तराधिकार का अधिकार अपने आप खत्म नहीं हो जाता। कानून में इसके लिए दोषसिद्धि और मामले की परिस्थितियों को देखा जाता है।

अगर सुब्रत को हत्या या हत्या के लिए उकसाने के मामले में दोषी ठहराया जाता है, तो हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 25 महत्वपूर्ण हो जाती है। इस प्रावधान के तहत हत्या करने या हत्या के लिए उकसाने वाला व्यक्ति मृतक की संपत्ति विरासत में पाने से अयोग्य हो जाता है। वहीं धारा 27 के अनुसार ऐसे व्यक्ति के मामले में उत्तराधिकार की गणना इस तरह की जाती है, जैसे वह मृतक से पहले ही मर चुका हो।

उत्तराधिकार कानून के जानकार और लॉयर्स संगठन के पूर्व अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश शुक्ला के मुताबिक, अगर किसी उत्तराधिकारी को मृतक की हत्या करने या उसमें भूमिका निभाने के मामले में दोषी पाया जाता है, तो वह मृतक की संपत्ति का हकदार नहीं रह सकता। ऐसे में अगर सुब्रत को सजा होती है, तो वह अपने पिता विनीत मिनोचा की संपत्ति का उत्तराधिकारी नहीं रह पाएगा। हालांकि, अगर वह अदालत से दोषमुक्त हो जाता है तो स्थिति बदल जाएगी।

अब सवाल यह है कि ऐसी स्थिति में बहू शालू और पांच साल के बच्चे का क्या होगा। अधिवक्ता दिनेश शुक्ला के मुताबिक, केवल बहू होने के आधार पर शालू को अपने ससुर की संपत्ति का सीधा उत्तराधिकारी नहीं माना जाएगा। वहीं बच्चे के अधिकार भी कई परिस्थितियों पर निर्भर करेंगे। इसमें संपत्ति की प्रकृति और विनीत मिनोचा की ओर से कोई वैध वसीयत छोड़ी गई थी या नहीं, जैसे पहलू महत्वपूर्ण होंगे।

यदि सुब्रत उत्तराधिकार से कानूनन अयोग्य घोषित होता है, तो उसकी जगह उत्तराधिकार की गणना संबंधित कानून के मुताबिक की जाएगी। ऐसी स्थिति में उसके बच्चे के संभावित अधिकारों का सवाल भी सामने आ सकता है।

वहीं शालू के अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित का कहना है कि इस समय संपत्ति को लेकर किसी अंतिम नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। उनका कहना है कि यदि सुब्रत को सजा भी मिलती है, तो उसके पास ऊपरी अदालत में फैसले को चुनौती देने का अधिकार रहेगा। पति और बच्चे के संपत्ति संबंधी अधिकार भी मामले की परिस्थितियों और लागू कानून के आधार पर तय होंगे।

एक स्थिति यह भी हो सकती है कि सुब्रत जेल से बाहर आने के बाद शालू और उनका बेटा उसके साथ नहीं रहना चाहें। ऐसी परिस्थिति में भी उनके संबंधित अधिकारों का निर्धारण कानून और न्यायालय के फैसले के आधार पर होगा।

अगर ट्रायल कोर्ट सुब्रत को हत्या के आरोप से बरी कर देता है, तो केवल इस मामले के आधार पर उसे उत्तराधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। ऐसी स्थिति में पिता की संपत्ति का बंटवारा सामान्य उत्तराधिकार कानून या विनीत मिनोचा की किसी वैध वसीयत के मुताबिक होगा।

वहीं अगर ट्रायल कोर्ट सुब्रत को दोषी ठहराता है, तो उसके पास उस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करने का अधिकार रहेगा। इसलिए विनीत मिनोचा की करोड़ों की संपत्ति का अंतिम उत्तराधिकार इस बात पर निर्भर करेगा कि आपराधिक मामले में अदालत का अंतिम फैसला क्या होता है और संपत्ति की प्रकृति तथा वसीयत की स्थिति क्या है।

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