बिहार में 30 हजार भूमिहीन परिवारों को मिलेगी आवासीय जमीन, जानें किसे मिलेगा लाभ

Knews Desk- बिहार सरकार भूमिहीन गरीब परिवारों को अपना घर बनाने के लिए जमीन उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। अभियान बसेरा-2 के तहत राज्य के 30 हजार भूमिहीन परिवारों को आवासीय जमीन देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सरकार की योजना के मुताबिक पात्र परिवारों को करीब 3 से 5 डिसमिल तक जमीन दी जा सकती है।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की इस योजना का उद्देश्य उन परिवारों को स्थायी वासभूमि उपलब्ध कराना है, जिनके पास अपना घर बनाने के लिए जमीन नहीं है। 25 जुलाई 2026 तक राज्य में 5,446 परिवारों को बंदोबस्ती प्रमाणपत्र दिए जा चुके थे।

अभियान बसेरा-2 के तहत पात्र परिवारों को करीब 3 से 5 डिसमिल आवासीय जमीन दिए जाने का प्रावधान है। तीन डिसमिल जमीन लगभग 1,307 वर्गफुट के बराबर होती है। यदि 30 हजार परिवारों को न्यूनतम तीन डिसमिल जमीन दी जाती है, तो कुल करीब 90 हजार डिसमिल जमीन की जरूरत होगी।

यह जमीन मुख्य रूप से घर बनाने के लिए उपलब्ध कराई जा रही है। इसका उद्देश्य बड़ी मात्रा में कृषि भूमि उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि भूमिहीन परिवारों को रहने के लिए स्थायी जगह देना है।

कौन ले सकता है योजना का लाभ?

योजना का लाभ उन्हीं परिवारों को मिलेगा जो सरकार की तय पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं। इसके लिए आवेदक का बिहार का निवासी होना जरूरी है। परिवार के पास रहने के लिए अपनी जमीन या पक्का मकान नहीं होना चाहिए।

इसके अलावा ऐसे परिवार भी योजना के दायरे में आ सकते हैं जो लंबे समय से सरकारी या गैर-मजरुआ जमीन पर झोपड़ी या कच्चे मकान में रह रहे हैं। संबंधित अंचल कार्यालय और राजस्व अधिकारियों की जांच के बाद पात्रता तय की जाएगी।

भूमिहीन महादलित, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के परिवारों के साथ आर्थिक रूप से कमजोर तथा गरीब परिवारों को भी प्राथमिकता दिए जाने की बात सामने आई है।

किन जिलों में सबसे ज्यादा परिवारों को मिला लाभ?

25 जुलाई तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार गया में सबसे ज्यादा 407 परिवारों को जमीन का प्रमाणपत्र दिया गया था। इसके बाद नालंदा में 378 और पटना में 363 परिवारों को लाभ मिला।

अन्य जिलों में औरंगाबाद में 296, बांका में 282, कटिहार में 222, बेगूसराय में 210, किशनगंज में 209, मुंगेर में 204 और समस्तीपुर में 189 परिवारों को प्रमाणपत्र मिला।

वहीं अरवल में 17, बक्सर में 23, पूर्णिया में 24 और सीवान में 25 परिवारों को अब तक प्रमाणपत्र दिया गया था।

जमीन का इस्तेमाल कैसे किया जा सकेगा?

सरकार की ओर से दी जाने वाली जमीन का प्रमुख उद्देश्य आवास निर्माण है। यानी लाभार्थी इसका इस्तेमाल अपना घर बनाने के लिए कर सकता है। इसे सामान्य बाजार की जमीन की तरह खरीद-बिक्री या किसी अन्य व्यावसायिक उद्देश्य से इस्तेमाल करने की छूट नहीं समझी जानी चाहिए। सरकारी नियमों का उल्लंघन होने पर कार्रवाई की जा सकती है।

सरकार ने 15 अगस्त 2026 तक 30 हजार पात्र भूमिहीन परिवारों को बंदोबस्ती प्रमाणपत्र देने का लक्ष्य रखा है। 25 जुलाई तक 5,446 परिवारों को प्रमाणपत्र मिल चुका था। इस हिसाब से लक्ष्य पूरा करने के लिए करीब 24,554 और परिवारों को लाभ पहुंचाना बाकी था।

यह योजना सिर्फ जमीन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। परिवार के नाम आवासीय जमीन होने से उसे स्थायी वासभूमि और पता मिलता है। इससे भविष्य में आवास सहित दूसरी सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी मदद मिल सकती है।

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