Mumbai BMC Transfer: मुंबई महानगरपालिका ने इंजीनियरों के तबादलों की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है. अब तीन साल या उससे अधिक समय से एक ही जगह तैनात इंजीनियरों के ट्रांसफर ऑनलाइन आवेदन और कंप्यूटर आधारित रैंडमाइजेशन सिस्टम के जरिए किए जाएंगे. इस कदम का मकसद तबादलों में पारदर्शिता बढ़ाना और कथित राजनीतिक हस्तक्षेप पर रोक लगाना है.
Knews dESK- मुंबई महानगरपालिका (BMC) में इंजीनियरों के तबादलों को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच प्रशासन ने नई व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है. अब नगर अभियंता विभाग में होने वाले तबादलों की प्रक्रिया को सॉफ्टवेयर आधारित किया जाएगा. इसके तहत कनिष्ठ अभियंता, उप अभियंता और सहायक अभियंताओं की नई पोस्टिंग कंप्यूटर आधारित रैंडमाइजेशन सिस्टम से तय की जाएगी.
BMC आयुक्त अश्विनी भिडे की ओर से जारी सर्कुलर में Employee Transfer System Based on Randomization को लागू करने की जानकारी दी गई है. नई व्यवस्था का उद्देश्य तबादलों में मानवीय हस्तक्षेप कम करना और पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है.
BMC में तबादलों की प्रक्रिया उस समय विवादों में आई, जब RTI कार्यकर्ता अनिल गलगली ने 225 अधिकारियों और कर्मचारियों के ट्रांसफर से जुड़े दस्तावेजों में मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों की सिफारिशों का मुद्दा उठाया. इसके बाद तबादलों में राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर सवाल और तेज हो गए.
मामले में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हस्तक्षेप की भी बात सामने आई थी. विवाद के बीच संबंधित अधिकारी के तबादले की जानकारी भी सामने आई. इसके बाद BMC में ट्रांसफर प्रक्रिया को लेकर पारदर्शी व्यवस्था की मांग जोर पकड़ने लगी.
कैसे काम करेगा नया रैंडमाइजेशन सिस्टम?
नई व्यवस्था के तहत किसी विभाग या स्थान पर तीन साल या उससे ज्यादा समय से काम कर रहे इंजीनियर तबादले के दायरे में आएंगे. ऐसे कर्मचारियों को ऑनलाइन आवेदन करने का मौका मिलेगा. वे अपनी पसंद और पोस्टिंग से जुड़ी प्राथमिकताएं भी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे.
इसके बाद कंप्यूटर आधारित रैंडमाइजेशन प्रक्रिया के माध्यम से पोस्टिंग तय की जाएगी. इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष के प्रभाव या सिफारिश के आधार पर मनचाही पोस्टिंग मिलने की संभावना को कम करना है.
राजनीतिक सिफारिशों पर लगेगा ब्रेक?
BMC इंजीनियरों के तबादलों को लेकर समय-समय पर राजनीतिक दबाव और पक्षपात के आरोप लगते रहे हैं. आरोपों में यह भी कहा जाता रहा है कि कुछ इंजीनियरों को राजनीतिक प्रभाव के जरिए पसंदीदा जगह पर पोस्टिंग मिल जाती है.
नई ऑनलाइन प्रणाली से प्रशासन को उम्मीद है कि तबादलों की प्रक्रिया में जवाबदेही बढ़ेगी और सिफारिश, दबाव तथा मनमाने फैसलों की गुंजाइश कम होगी.
‘कैश फॉर ट्रांसफर’ के आरोप भी लगे
इंजीनियरों के तबादलों को लेकर सिर्फ राजनीतिक सिफारिशों ही नहीं, बल्कि कथित आर्थिक लेनदेन के आरोप भी सामने आते रहे हैं. BJP विधायक मिहिर कोटेचा ने BMC इंजीनियरों के तबादलों में कथित ‘कैश फॉर ट्रांसफर’ का आरोप लगाते हुए मामले की जांच की मांग की थी.
उन्होंने इंजीनियरों के तबादलों में कथित वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जांच की मांग मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल से की थी.
सभी विभागों में लागू करने की मांग
RTI कार्यकर्ता अनिल गलगली ने नई व्यवस्था का स्वागत करते हुए इसे तबादलों में पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया. उनका कहना है कि जिस तरह इंजीनियरों के ट्रांसफर को ऑनलाइन और रैंडमाइजेशन आधारित किया जा रहा है, उसी तरह भविष्य में BMC के दूसरे विभागों में भी ऐसी व्यवस्था लागू की जानी चाहिए.
अब नई व्यवस्था के लागू होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कंप्यूटर आधारित रैंडमाइजेशन वास्तव में राजनीतिक सिफारिशों और कथित मनमानी पर प्रभावी रोक लगा पाएगा.