KNEWS DESK- तेलंगाना के हैदराबाद में उस्मानिया जनरल अस्पताल (OGH) के डॉक्टरों ने बेहद चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करते हुए 16 साल के एक किशोर के पेट से रेजर ब्लेड के तीन नुकीले टुकड़े निकाल दिए। किशोर द्वारा कई रेजर ब्लेड निगल लिए जाने के बाद उसे अस्पताल लाया गया था। एक्स-रे में पेट के अंदर ब्लेड के टुकड़े दिखाई देने के बाद डॉक्टरों ने तत्काल इलाज शुरू किया।
जानकारी के मुताबिक, किशोर को गुरुवार रात करीब 2 बजे उस्मानिया जनरल अस्पताल लाया गया। अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने सबसे पहले उसका एक्स-रे कराया। जांच में पेट के अंदर कई रेडियो-ओपेक ब्लेड के टुकड़े दिखाई दिए। इसके बाद मरीज को मेडिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में रेफर किया गया, जहां विशेषज्ञों की टीम ने आगे की जांच और उपचार किया।
एंडोस्कोपी से निकाले गए तीन टुकड़े
मेडिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर और प्रमुख डॉ. बी. रमेश कुमार के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने मिनिमली इनवेसिव जीआई एंडोस्कोपी की मदद से पेट में मौजूद नुकीले ब्लेड के टुकड़ों को निकालने की प्रक्रिया शुरू की।
डॉक्टरों ने सावधानीपूर्वक काम करते हुए रेजर ब्लेड के तीन टुकड़े बाहर निकाल लिए। नुकीली धातु के टुकड़ों के कारण यह प्रक्रिया सामान्य विदेशी वस्तु निकालने की तुलना में काफी जोखिम भरी थी।
अंदरूनी चोट का था बड़ा खतरा
डॉक्टरों के मुताबिक, इस तरह के नुकीले विदेशी पदार्थ को शरीर से निकालते समय अंदरूनी हिस्सों में कट लगने या किसी अंग में छेद होने का खतरा रहता है। डॉ. रमेश कुमार ने बताया कि प्रक्रिया के दौरान लापरवाही की स्थिति में गंभीर अंदरूनी चोट हो सकती थी। इसलिए पूरी प्रक्रिया बेहद सावधानी के साथ की गई।
अस्पताल के अधिकारियों के मुताबिक, किशोर का मानसिक स्वास्थ्य संबंधी बीमारी का इतिहास भी रहा है। हालांकि, प्रक्रिया सफल रहने के बाद उसकी रिकवरी में किसी तरह की परेशानी सामने नहीं आई और फिलहाल उसकी हालत ठीक बताई जा रही है।
OGH की टीम को ऐसे मामलों का अनुभव
वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि उस्मानिया जनरल अस्पताल की मेडिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी टीम को शरीर के अंदर फंसी अलग-अलग तरह की विदेशी वस्तुओं को एंडोस्कोपी के जरिए निकालने का अनुभव है। इसी विशेषज्ञता के चलते इस मामले में भी बिना बड़ी सर्जरी के नुकीले ब्लेड के टुकड़ों को निकालने में सफलता मिली।
डॉक्टरों की टीम की इस सफल कोशिश के बाद किशोर की हालत स्थिर है और वह चिकित्सकीय निगरानी में है। यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि शरीर के अंदर नुकीली या खतरनाक वस्तु चले जाने पर तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सा सहायता लेना कितना जरूरी है।