कौन हैं देवेंद्र नाथ महतो? JPSC-JSSC अभ्यर्थियों के समर्थन में आमरण अनशन, सोनम वांगचुक से क्यों हो रही तुलना?

Knews Desk- झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है। राजधानी रांची में बड़ी संख्या में छात्र अपनी मांगों को लेकर सत्याग्रह कर रहे हैं। इसी आंदोलन के बीच छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। लगातार भूख हड़ताल के कारण वह आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए हैं और सोशल मीडिया पर उनकी तुलना सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से भी की जा रही है।

रांची के कचहरी रोड स्थित जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अभ्यर्थी पिछले कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन सत्याग्रह कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि JPSC और JSSC की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताएं हुई हैं। छात्रों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

छात्रों के आंदोलन को समर्थन देते हुए देवेंद्र नाथ महतो ने 2 अगस्त से आमरण अनशन शुरू किया। उनका कहना है कि यह लड़ाई केवल कुछ अभ्यर्थियों की नहीं, बल्कि झारखंड के हजारों युवाओं के भविष्य से जुड़ी है। उन्होंने मांगें पूरी होने तक अपना आंदोलन जारी रखने की बात कही है।

लंबे अनशन और आंदोलन के तरीके को देखते हुए कुछ लोग उनकी तुलना सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से कर रहे हैं। हालांकि दोनों के आंदोलनों के मुद्दे और परिस्थितियां अलग हैं।

क्या हैं आंदोलनकारी छात्रों की मांगें?

प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की CBI जांच, 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने, कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और आगामी भर्ती परीक्षाओं को पारदर्शी तरीके से आयोजित करने की मांग प्रमुख है। इसके साथ ही अभ्यर्थी नियमित नियुक्तियों के लिए भर्ती कैलेंडर जारी करने की मांग भी कर रहे हैं।

देवेंद्र नाथ महतो झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के केंद्रीय उपाध्यक्ष हैं। वह रांची जिले के राहे प्रखंड के कापीडीह गांव के रहने वाले हैं। पोस्ट ग्रेजुएशन तक पढ़ाई कर चुके महतो लंबे समय से छात्रों, युवाओं और रोजगार से जुड़े मुद्दों को उठाते रहे हैं।

स्थानीय नीति, नियोजन नीति और रोजगार जैसे मुद्दों को लेकर हुए कई आंदोलनों में उनकी सक्रिय भागीदारी रही है। विभिन्न विरोध प्रदर्शनों के दौरान उनके खिलाफ मामले भी दर्ज हुए और उन्हें जेल भी जाना पड़ा है।

2024 में चुनावी मैदान में भी उतरे

छात्र राजनीति के साथ देवेंद्र नाथ महतो चुनावी राजनीति में भी अपनी किस्मत आजमा चुके हैं। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने रांची संसदीय सीट से चुनाव लड़ा था और उन्हें 1,32,647 वोट मिले थे। इसके बाद झारखंड विधानसभा चुनाव में वह सिल्ली सीट से मैदान में उतरे। यहां उन्हें 41,725 वोट मिले और वह तीसरे स्थान पर रहे।

JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों का यह आंदोलन अब झारखंड की राजनीति में भी चर्चा का विषय बनता जा रहा है। देवेंद्र नाथ महतो के आमरण अनशन ने इस आंदोलन को और सुर्खियों में ला दिया है। अब निगाहें राज्य सरकार और संबंधित आयोगों पर हैं कि छात्रों की मांगों को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

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