KGMU में फर्जी डॉक्टर का पर्दाफाश, छात्राओं को निशाना बनाने वाले नेटवर्क का खुलासा

KNEWS DESK- लखनऊ के King George’s Medical University (KGMU) से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ चिकित्सा संस्थान की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि छात्रों खासकर छात्राओं की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा कर दी है। यहां एक ऐसे युवक का भंडाफोड़ हुआ है जो खुद को डॉक्टर बताकर मेडिकल छात्रों को झांसे में ले रहा था, जबकि वह महज 12वीं पास निकला। जांच में सामने आया है कि उसका नेटवर्क सिर्फ धोखाधड़ी तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार कथित तौर पर धर्मांतरण और शोषण जैसे गंभीर आरोपों से भी जुड़े हो सकते हैं।

यह मामला तब उजागर हुआ जब KGMU प्रशासन को परिसर में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली। दरअसल, इससे पहले भी विश्वविद्यालय में इसी तरह के एक बड़े मामले का खुलासा हो चुका था, जिसके बाद प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी थी और एक विशेष निगरानी समिति गठित की थी। इसी समिति को जानकारी मिली कि एक व्यक्ति मेडिकल कैंप और कॉन्फ्रेंस के नाम पर छात्राओं को अपने जाल में फंसा रहा है।

आरोपी की पहचान हस्साम अहमद के रूप में हुई है, जो “कार्डियो सेवा संस्थान” नाम की एक फर्जी संस्था चलाता था। वह खुद को डॉक्टर बताकर छात्रों से संपर्क करता और खासतौर पर लड़कियों को टारगेट करता था। आरोप है कि वह उन्हें मेडिकल कैंप में शामिल होने या बड़े संस्थानों में होने वाली कॉन्फ्रेंस में ले जाने का झांसा देता था।

मामले का खुलासा तब हुआ जब 19 अप्रैल को एक ऐसे ही कथित मेडिकल कैंप की सूचना मिली। KGMU के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डीन और प्रवक्ता मौके पर पहुंचे, जहां करीब 50 युवक-युवतियां मौजूद थे। इनमें से कुछ छात्र KGMU के ही थे, जिनमें कई छात्राएं भी शामिल थीं। पूछताछ के दौरान पता चला कि आरोपी उन्हें दिल्ली के एक बड़े मेडिकल संस्थान में होने वाली कॉन्फ्रेंस में ले जाने की बात कह रहा था।

जब प्रशासन ने इस दावे की पुष्टि के लिए संबंधित संस्थान से संपर्क किया, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ—ऐसी कोई कॉन्फ्रेंस आयोजित ही नहीं हो रही थी। यहीं से पूरे मामले पर शक गहराया और आरोपी की गतिविधियों की जांच शुरू की गई। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने फर्जी लेटरहेड और हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया था। उसने खुद को डॉक्टर बताते हुए विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों के नकली सिग्नेचर तक इस्तेमाल किए थे, जिससे उसकी बात पर आसानी से भरोसा किया जा सके।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए KGMU प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है और फिलहाल उससे पूछताछ जारी है। इस पूरे मामले में सबसे गंभीर पहलू यह है कि जांच एजेंसियों को इसके तार एक बड़े नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका है। अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का मामला नहीं हो सकता, बल्कि इसके पीछे एक संगठित गिरोह हो सकता है, जो युवाओं खासकर लड़कियों को निशाना बनाता है।

जांच में एक और नाम सामने आया है -फईक अहमद मंसूरी, जिसे इस फर्जी संस्था का संस्थापक बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि वह भी इस पूरे नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है और फिलहाल उसकी भूमिका की जांच की जा रही है। KGMU प्रशासन के अनुसार, ऐसे गिरोह पहले छात्रों का भरोसा जीतते हैं और फिर उन्हें धीरे-धीरे अपने प्रभाव में लेते हैं। खासतौर पर छात्राओं को निशाना बनाकर उन्हें अलग-अलग तरीकों से बहलाया-फुसलाया जाता है। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के मामलों में मानसिक दबाव, झूठे वादे और कभी-कभी ब्लैकमेल जैसे तरीके भी अपनाए जा सकते हैं, इसलिए पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है।

इस घटना के सामने आने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में हड़कंप मच गया है। छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ गई है। कई लोगों ने सवाल उठाया है कि आखिर कोई व्यक्ति इतनी आसानी से खुद को डॉक्टर बताकर मेडिकल यूनिवर्सिटी में कैसे घूमता रहा और छात्रों तक पहुंच बनाता रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक संस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़ी चेतावनी भी है। शिक्षा संस्थानों में बाहरी लोगों की एंट्री और उनकी गतिविधियों पर कड़ी निगरानी जरूरी है, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

पुलिस अब आरोपी के मोबाइल, दस्तावेजों और संपर्कों की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसके नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस तरह के और कैंप पहले भी आयोजित किए गए थे और कितने छात्र-छात्राएं इसके संपर्क में आए। प्रशासन ने छात्रों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है और कहा है कि किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की जानकारी तुरंत अधिकारियों को दें। विश्वविद्यालय ने सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को और मजबूत करने के संकेत भी दिए हैं।

यह मामला न सिर्फ एक फर्जी डॉक्टर के पर्दाफाश का है, बल्कि यह एक बड़े संभावित नेटवर्क की ओर इशारा करता है। आने वाले दिनों में जांच के साथ और भी चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल, पुलिस और प्रशासन दोनों इस मामले को गंभीरता से लेते हुए हर पहलू की जांच कर रहे हैं, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।

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