‘अगर मैं बाहर से आती…’ आशा भोसले का छलका दर्द, लता मंगेशकर से तुलना पर बड़ा बयान

KNEWS DESK – भारतीय संगीत जगत के लिए 12 अप्रैल एक बेहद भावुक दिन बन गया, जब सुरों की जादूगरनी Asha Bhosle ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके निधन के साथ ही संगीत का एक सुनहरा दौर जैसे थम सा गया। देश ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में उनकी आवाज़ के चाहने वाले मौजूद हैं, जो आज भी उनके गीतों में उन्हें महसूस करते हैं।

अपने लंबे करियर में आशा भोसले ने हजारों गानों में अपनी आवाज़ का जादू बिखेरा। लेकिन इस शानदार सफर के बावजूद उनकी तुलना अक्सर उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर से होती रही। यह तुलना कई बार चर्चा का विषय बनी और खुद आशा भोसले ने भी इस पर खुलकर अपनी बात रखी थी।

“कौन ऊंचा, कौन नीचा, ये तुलना क्यों?”

एक पुराने इंटरव्यू में आशा भोसले ने इस तुलना पर अपनी बेबाक राय दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर वे किसी और जगह से आतीं और लता मंगेशकर की बहन नहीं होतीं, तो शायद लोग इस तरह की तुलना नहीं करते।

उनका मानना था कि एक ही परिवार से होने और छोटी बहन होने की वजह से उन्हें हमेशा “छोटा” ही माना गया। उन्होंने कहा था, यह एक तरह की परंपरा बन गई है कि छोटी बहन को हमेशा कमतर आंका जाता है, और उन्होंने इस सोच को समय के साथ स्वीकार भी कर लिया था।

पहचान बनाने के लिए बदला अंदाज़

आशा भोसले ने अपने करियर में कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। एक समय ऐसा भी आया जब किसी प्रोडक्शन हाउस में उनकी आवाज़ को लता मंगेशकर की आवाज़ समझ लिया गया।

इस घटना ने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया कि अगर उनकी पहचान अलग नहीं बनी, तो उन्हें काम मिलना मुश्किल हो जाएगा। इसके बाद उन्होंने खुद को बदला, वेस्टर्न म्यूजिक को अपनाया, नए-नए प्रयोग किए और धीरे-धीरे इंडस्ट्री की सबसे वर्सेटाइल सिंगर्स में अपनी जगह बना ली।

संघर्ष से बनी अलग पहचान

जहां लता मंगेशकर को “सुरों की कोकिला” कहा जाता था, वहीं Asha Bhosle ने खुद को हर तरह के गानों में ढालकर एक अलग मुकाम हासिल किया। चाहे ग़ज़ल हो, पॉप हो या कैबरे उन्होंने हर शैली में अपनी अलग पहचान बनाई।

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