KNEWS DESK- बिहार की राजनीति में आज एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां लंबे समय तक सत्ता संभालने वाले नीतीश कुमार का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है। मंगलवार को पटना में उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में अपनी आखिरी कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता की, जो भावुक माहौल के बीच संपन्न हुई। इस बैठक के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का फैसला किया, जिसके साथ ही राज्य में एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत तय मानी जा रही है।
पटना में हुई इस आखिरी कैबिनेट बैठक में कोई बड़ा एजेंडा नहीं रखा गया था, लेकिन इसका महत्व राजनीतिक रूप से काफी बड़ा था। बैठक के दौरान नीतीश कुमार खुद भी भावुक नजर आए और उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ बिताए समय को याद किया। उन्होंने आने वाली नई सरकार को शुभकामनाएं भी दीं, जिससे यह साफ संकेत मिला कि सत्ता परिवर्तन अब तय है।
बैठक खत्म होने के बाद सचिवालय परिसर में एक अलग ही दृश्य देखने को मिला, जहां मंत्री और अधिकारी नीतीश कुमार के साथ यादगार पलों को कैद करने के लिए सेल्फी लेते नजर आए। यह पल उनके लंबे राजनीतिक सफर के अंत का प्रतीक बन गया। इसके बाद सामूहिक फोटोग्राफी भी की गई और फिर उन्होंने अपने इस्तीफे की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद अब राज्य में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी। सूत्रों के अनुसार, बुधवार को नई सरकार शपथ ले सकती है, जिसमें नए मुख्यमंत्री के साथ दो उपमुख्यमंत्री भी शपथ लेंगे। माना जा रहा है कि इस बार भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में सरकार बनेगी, जो बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव होगा।
राजनीतिक घटनाक्रम के बीच यह भी उल्लेखनीय है कि नीतीश कुमार ने हाल ही में राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली थी, जिसके बाद से ही उनके पद छोड़ने की अटकलें तेज हो गई थीं। अब उनके इस्तीफे के साथ यह स्पष्ट हो गया है कि वह एक नई भूमिका में नजर आएंगे।
विधानसभा के समीकरणों पर नजर डालें तो 243 सदस्यीय सदन में भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पास स्पष्ट बहुमत है, जिसमें जदयू, लोजपा (रामविलास), हम और अन्य सहयोगी दल भी शामिल हैं। शाम को एनडीए की बैठक में विधायक दल का नेता चुना जाएगा और सरकार बनाने का दावा पेश किया जाएगा।
इस बीच सम्राट चौधरी का नाम मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार के रूप में सामने आ रहा है। वर्तमान में उनके पास गृह विभाग की जिम्मेदारी है और पार्टी के भीतर उनकी स्थिति मजबूत मानी जा रही है। अगर ऐसा होता है, तो बिहार में एक नए नेतृत्व के साथ नई सरकार का गठन होगा।
कुल मिलाकर, बिहार में यह राजनीतिक बदलाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि एक युग के अंत और नए दौर की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जहां आने वाले समय में राज्य की राजनीति नई दिशा में आगे बढ़ती नजर आएगी।