चीनी कंपनियों के शेयरों में क्यों मचा हड़कंप? सरकार के फैसले से बदला शुगर स्टॉक्स का गणित

Knews Desk: शेयर बाजार में मंगलवार, 25 अगस्त को शुगर कंपनियों के शेयरों में अचानक भारी बिकवाली देखने को मिली। बलरामपुर चीनी, बजाज हिंदुस्तान शुगर और श्री रेणुका शुगर्स जैसी कंपनियों के शेयरों में कारोबार के दौरान करीब 3.5 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई। शुगर स्टॉक्स में आई इस गिरावट की बड़ी वजह सरकार की ओर से रॉ शुगर यानी कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात से जुड़े नियमों में किया गया बदलाव है। सरकार के इस फैसले से बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ने की उम्मीद है, जिसके चलते निवेशकों को चीनी कंपनियों के मुनाफे पर दबाव की आशंका नजर आई।

दरअसल, सरकार आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों को नियंत्रण में रखना चाहती है। त्योहारों के दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य उत्पादों में चीनी की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में अगर सप्लाई कम रहती है तो कीमतों में तेजी आ सकती है। सरकार ने इसी संभावना को देखते हुए कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात के नियमों में ढील दी है। इस कदम का मकसद बाजार में पर्याप्त सप्लाई बनाए रखना और जमाखोरी जैसी गतिविधियों पर रोक लगाना है।इससे पहले सरकार ने 20 अगस्त को टैरिफ-रेट कोटा यानी TRQ के तहत 31 अक्टूबर 2026 तक 10 लाख टन रॉ शुगर के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी थी। पुराने नियम के मुताबिक आयातकों को कच्ची चीनी को रिफाइन करके 31 अक्टूबर तक घरेलू बाजार में बेचने की बाध्यता थी। अब विदेश व्यापार महानिदेशालय यानी DGFT ने इस तय समय सीमा में बदलाव कर दिया है।

नए नियम के तहत अब आयातकों को बिल ऑफ एंट्री दाखिल करने की तारीख से दो महीने का समय मिलेगा। यानी उन्हें कच्ची चीनी के आयात, रिफाइनिंग और घरेलू बाजार में उसकी सप्लाई के लिए पहले की तुलना में ज्यादा लचीलापन मिल गया है। इससे आने वाले समय में बाजार में रिफाइंड चीनी की उपलब्धता बढ़ सकती है।बाजार में इस फैसले का सीधा असर शुगर कंपनियों के शेयरों पर देखने को मिला। निवेशकों को डर है कि अगर आयातित कच्ची चीनी की प्रोसेसिंग के बाद घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ती है तो चीनी की कीमतों पर दबाव बन सकता है। कीमतों में गिरावट का असर चीनी मिलों की बिक्री और मार्जिन पर पड़ सकता है। इसी आशंका के चलते कई निवेशकों ने शुगर स्टॉक्स में मुनाफावसूली शुरू कर दी।

सरकार ने एडवांस ऑथराइजेशन से जुड़े कारोबारियों को भी राहत दी है। SION E-52 के तहत जारी मौजूदा एडवांस ऑथराइजेशन को एक बार के लिए TRQ योजना में बदलने की अनुमति दी गई है। यह सुविधा उन मामलों में लागू होगी, जिनमें 20 अगस्त तक रॉ शुगर का आयात हो चुका था। इसमें आयातित कच्चे माल से तैयार की जा चुकी रिफाइंड चीनी और आगे प्रोसेस की जाने वाली चीनी भी शामिल है।हालांकि, इस सुविधा का लाभ लेने के लिए कंपनियों को आयात के समय मिली GST छूट की राशि का भुगतान करना होगा। कुल मिलाकर सरकार का यह कदम त्योहारी सीजन में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों पर नियंत्रण रखने की दिशा में है, लेकिन शुगर कंपनियों के लिए यह फैसला फिलहाल बाजार में चिंता का कारण बन गया है।

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