KNEWS DESK – मराठी और हिंदी सिनेमा की चर्चित अभिनेत्री सोनाली कुलकर्णी ने अपने करियर के शुरुआती दिनों से जुड़ा एक ऐसा किस्सा साझा किया है, जिसने हर किसी का ध्यान खींच लिया है। उन्होंने स्वीकार किया कि एक समय ऐसा था जब उन्हें तब्बू से जलन होने लगी थी, क्योंकि उन्हें लगता था कि जिस राष्ट्रीय पुरस्कार की वह हकदार थीं, वह किसी और को मिल गया।
नेशनल अवॉर्ड न मिलने का रहा मलाल
सोनाली कुलकर्णी ने बताया कि साल 1997 में उन्होंने निर्देशक अमोल पालेकर की एक चर्चित फिल्म में मुख्य भूमिका निभाई थी। यह फिल्म ट्रांसजेंडर समुदाय पर आधारित थी और उस दौर में काफी चर्चा में रही।
अभिनेत्री को पूरा भरोसा था कि इस दमदार प्रदर्शन के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उस वर्ष फिल्म माचिस के लिए तब्बू को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।
‘हर अवॉर्ड जीतने वाले से होती थी जलन’
एक इंटरव्यू में सोनाली ने कहा कि उस समय वह हर उस कलाकार से ईर्ष्या करने लगी थीं, जिसे पुरस्कार मिल रहे थे। उनका मानना था कि लगातार उनकी फिल्मों को सराहना मिल रही थी, लेकिन व्यक्तिगत तौर पर उन्हें वह सम्मान नहीं मिल रहा था, जिसकी उन्हें सबसे ज्यादा इच्छा थी।
उन्होंने बताया कि कई दूसरे पुरस्कार मिलने के बावजूद उनके मन में सिर्फ नेशनल अवॉर्ड हासिल करने की चाह थी, और यही अधूरी इच्छा उन्हें अंदर ही अंदर परेशान करती रही।
तब्बू को लेकर बना था गलत नजरिया
सोनाली ने स्वीकार किया कि शुरुआत में उन्हें लगता था कि तब्बू को इंडस्ट्री में मजबूत पारिवारिक पृष्ठभूमि का फायदा मिला है। उन्होंने यह भी माना कि उस समय उनकी सोच पूरी तरह भावनाओं से प्रभावित थी।
हालांकि जब उन्होंने माचिस देखी, तो उनकी राय पूरी तरह बदल गई। तब्बू की अभिनय क्षमता ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि उनकी सारी गलतफहमियां दूर हो गईं।
‘तब्बू की एक्टिंग ने बदल दी सोच’
सोनाली ने कहा कि माचिस देखने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि तब्बू ने अपने अभिनय से यह सम्मान पूरी तरह डिजर्व किया था। इसके बाद उन्होंने अस्तित्व और चांदनी बार जैसी फिल्मों में तब्बू का काम देखा, जिससे उनके मन में अभिनेत्री के लिए सम्मान और बढ़ता गया। उन्होंने कहा कि तब्बू की शानदार परफॉर्मेंस ने उन्हें अपनी असुरक्षाओं से बाहर निकलने और नकारात्मक सोच से उबरने में भी मदद की।