रानी मुखर्जी की मां और मशहूर सिंगर कृष्णा मुखर्जी का निधन, 75 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

Knews Desk – हिंदी सिनेमा जगत से एक बेहद दुखद और गमगीन खबर सामने आ रही है। बॉलीवुड की मशहूर एक्ट्रेस रानी मुखर्जी पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनकी मां और बीते दौर की जानी-मानी पार्श्व गायिका कृष्णा मुखर्जी का निधन हो गया है। उन्होंने 75 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। मंगलवार, 22 सितंबर की दोपहर जैसे ही उनके देहांत की खबर आई, पूरी फिल्म इंडस्ट्री और रानी के चाहने वालों के बीच शोक की लहर दौड़ गई।

कृष्णा मुखर्जी के निधन के बाद रानी मुखर्जी और उनके परिवार ने एक भावुक बयान जारी कर आधिकारिक पुष्टि की। परिवार की ओर से शेयर किए गए मैसेज में लिखा गया, “अत्यंत भारी मन से हम ये बता रहे हैं कि रानी मुखर्जी की पूज्य माताजी श्रीमती कृष्णा मुखर्जी (75 वर्ष) का आज दोपहर निधन हो गया है। हमारा परिवार आप सभी के प्यार, प्रार्थनाओं और संबल के लिए दिल से आभारी है। इस बेहद गहरे दुख और शोक की घड़ी में हम आपसे प्राइवेसी की गुजारिश करते हैं।”

कृष्णा मुखर्जी सिर्फ रानी मुखर्जी की मां ही नहीं थीं, बल्कि कला और संगीत से उनका बहुत पुराना नाता था। वे हिंदी सिनेमा की एक मंझी हुई पार्श्व गायिका थीं और उन्होंने कई फिल्मों में अपनी आवाज का जादू बिखेरा था। उनकी शादी मशहूर फिल्म निर्माता-निर्देशक राम मुखर्जी से हुई थी। राम मुखर्जी हिंदी सिनेमा के प्रतिष्ठित ‘फिल्मालय स्टूडियोज’ के सह-संस्थापक थे। राम मुखर्जी का निधन साल 2017 में हुआ था।

रानी मुखर्जी अपनी मां के बेहद करीब थीं और उन्होंने हमेशा अपने इंटरव्यू में मां के साथ अपनी खास बॉन्डिंग का जिक्र किया। रानी की चर्चित फिल्म ‘मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे’, जिसमें उन्होंने अपने बच्चों को वापस पाने के लिए एक पूरे देश के सिस्टम से जंग लड़ रही बंगाली मां का किरदार निभाया था, उसके पीछे की असली प्रेरणा उनकी अपनी मां कृष्णा मुखर्जी ही थीं।

साल 2023 में फिल्म के प्रमोशन के दौरान रानी ने इस बात का खुलासा करते हुए कहा था कि एक एक्टर के तौर पर वह इस किरदार में अपना नजरिया लाना चाहती थीं। उन्होंने बताया था कि उन्होंने असल कहानी से जुड़े कुछ संदर्भ जरूर देखे थे, लेकिन पर्दे पर निभाए गए उस किरदार का ज्यादातर हिस्सा वास्तव में उनकी मां पर आधारित था। रानी ने कहा था कि जितने भी बंगाली लोगों को वह जानती हैं, उनमें उनकी मां सबसे ज्यादा पक्की बंगाली हैं। चाहे अपने हाथों से खाना खिलाना हो या माथे पर टीका लगाना, उस पूरी भूमिका के लिए उन्हें ताकत और प्रेरणा अपनी मां से ही मिली थी।

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