सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिगों के सोशल मीडिया इस्तेमाल से जुड़े मामले में केंद्र सरकार से मौजूदा नियमों को प्रभावी तरीके से लागू करने पर विचार करने को कहा है। याचिका में 18 साल से कम उम्र के बच्चों के स्वतंत्र रूप से सोशल मीडिया अकाउंट बनाने पर रोक और अभिभावकों की निगरानी में सीमित पहुंच की व्यवस्था की मांग की गई है।
Knews Desk – सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिगों के सोशल मीडिया अकाउंट इस्तेमाल को लेकर केंद्र सरकार से सुरक्षा उपायों को प्रभावी बनाने पर विचार करने को कहा है। यह मामला ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस’ की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। 10 सितंबर 2026 को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने केंद्र के संबंधित मंत्रालयों से जवाब मांगा था।
याचिका में मांग की गई है कि 18 साल से कम उम्र के बच्चे डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया कंपनियों के साथ स्वतंत्र रूप से अनुबंध न कर सकें और उनके लिए प्रभावी आयु सत्यापन की व्यवस्था बनाई जाए। याचिकाकर्ता का तर्क है कि भारतीय अनुबंध कानून के तहत नाबालिग स्वतंत्र रूप से अनुबंध करने में सक्षम नहीं होते, जबकि सोशल मीडिया अकाउंट बनाते समय यूजर्स को प्लेटफॉर्म की शर्तों और नीतियों को स्वीकार करना पड़ता है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि बच्चों को पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म से अलग करने के बजाय अभिभावक या कानूनी संरक्षक की सहमति और निगरानी में सीमित पहुंच दी जा सकती है। इसके तहत शैक्षणिक और उम्र के अनुरूप डिजिटल सामग्री तक पहुंच बनाए रखने का प्रस्ताव रखा गया है।
मौजूदा नियमों को लेकर क्या है सवाल?
याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि मौजूदा इंटरमीडियरी नियमों में नाबालिगों की स्वतंत्र रूप से सोशल मीडिया अकाउंट बनाने की समस्या के लिए प्रभावी और समान आयु सत्यापन व्यवस्था नहीं है। याचिका में उम्र की केवल घोषणा के बजाय सत्यापन आधारित एज-अश्योरेंस और एज-गेटिंग व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि नाबालिगों की ऑनलाइन गतिविधियों से उन्हें ऑनलाइन ग्रूमिंग, साइबरबुलिंग, अनुचित सामग्री, व्यक्तिगत डेटा के दुरुपयोग और अन्य जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है। इन चिंताओं को आधार बनाकर केंद्र से डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए ज्यादा प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था तैयार करने की मांग की गई है।
18 साल की उम्र को लेकर क्या है कानूनी आधार?
याचिका में भारतीय अनुबंध अधिनियम, 1872 की धारा 11 और मेजॉरिटी एक्ट, 1875 का हवाला दिया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि 18 साल से कम उम्र के व्यक्ति को स्वतंत्र रूप से अनुबंध करने में सक्षम नहीं माना जाता, जबकि सोशल मीडिया अकाउंट बनाने में प्लेटफॉर्म की सेवा शर्तों और अन्य समझौतों को स्वीकार करना पड़ता है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिगों के सोशल मीडिया अकाउंट पर अंतिम रोक लगाने का आदेश नहीं दिया है। कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा है और मामले में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है।